"वेदाङ्ग ज्योतिष" के अवतरणों में अंतर

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: सिद्धान्तसंहिताहोरारुपं स्कन्धत्रयात्मकम् ।
: वेदस्य निर्मलं चक्षुर्ज्योतिश्शास्त्रमनुत्तमम् ॥
 
वेदाङ्गज्योतिष में [[गणित]] के महत्व का प्रतिपादन इन शब्दों में किया गया है-
: यथा शिखा मयूराणां नागानां मणयो यथा।
: तथा वेदाङ्गशास्त्राणां गणितं मूर्ध्नि स्थितम्॥
: ''( जिस प्रकार मोरों में शिखा और नागों में मणि का स्थान सबसे उपर है, उसी प्रकार सभी वेदांग और शास्त्रों मे गणित का स्थान सबसे उपर है।)''
 
==इन्हें भी देखें==