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== इतिहास ==
[[चित्र:John Napier-Logarithmorum 1620.jpg|right|thumb|300px|जॉन नेपियर की पुस्तक का मुखपृष्ट]]
[[स्कॉटलैंड]] निवासी [[जॉन नेपियर]] तथा [[स्विट्जरलैंड]] के [[जूस्ट बुर्गी]] (Joost Burgi) ने स्वतंत्र रूप से लघुगणक का आविष्कार किया। इन दोनों के लघुगणक एक दूसरे से भिन्न थे तथा प्राकृतिक लघुगणक और सामान्य लघुगणक भी भिन्न थे। नेपियर का लघुगणक 1614 ई. में एड्नवर (Edinburgh) में ''मिरिफिसी लॉगेरिथमोरम केनोनिस डिसक्रिप्शियो'' (Mirifici logarithmorum canonis descriptio)'' शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित हुआ। 1620 ई. में प्रेग (Prague) में जूस्ट बुर्गी का लघुगणक ''अरिथमेटिशे उंडर ज्योमेट्रिशे प्रोग्रेस टेबूलेन (Arithmetische under Geometrische Progress Tabulen)'' शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित हुआ। इस समय तक सारे [[यूरोप]] में नेपियर के लघुगणक का प्रचार हो चुका था। उनके सिद्धांत एवं परिकलन पद्धति का पूर्ण उल्लेख, उनकी पुस्तक ''मिरिफ़िसी लॉगरिथमोरम केनोनिस कंस्ट्रक्सियो, (Mirifice logarithmorum canonis constructio)'' में मिलता है, जो उनकी मृत्यु के दो वर्ष पश्चात्‌ 1619 ई. में प्रकाशित हुई। डब्लू.आर. मैक्डॉनैल्ड (W.R. Macdonald) ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद 1889 ई. में किया। 1614 ई. के नेपिरियन लघुगणक तथा प्राकृतिक लघुगणक का पारस्परिक संबंध निम्न ढंग से व्यक्त किया जाता है :
 
: नेप लघु र = 10<sup>7</sup> लघु <sup>(10 / र)</sup>
 
जॉन वॉलिस (John Wallis) ने 1685 ई. तथा बेर्नूली ने 1694 ई. में लघुगणक से संगत समीकरण '''ब<sup>ल</sup> = न''' का अनुमान किया। इस विचार पर आधारित लघुगणक का उल्लेख 1742 ई. से मिलता है। इसका वर्णन ''गार्डिनर्स टेबुल्स ऑव लॉगैरिथम्स (Gardiners Tables of Logarithms)'' की भूमिका में मिलता है। इसका श्रेय विलियम जोम्स (William Jones) को दिया जाता है।
 
प्राचीन '''[[भारत]]''' में मूलभूत लघुगणक का उपयोग '[[षट्खण्डागम]]' (150 ई) में देखने को मिलता है।
 
== साधारण लघुगणक (Common logarithm) ==