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कुछ प्रकार की घासें, जिनमें प्रसारण (propagation), विरोहक (stolon) तथा प्रकंद (rhizone) से होता है, कम वर्षा वाले प्रदेशों में बहुत उगती हैं। इनमें दूब प्रधान घास है। इसे धर्मग्रंथों में राष्ट्ररक्षक (Preserver of nations) एवं '[[भारत]] की ढाल' (Shield of India) कहा गया है। मिट्टी के भीतर इन घासों की जड़ों का घना जाल रहता है, जिससे वर्षाजल से मिट्टी का कटाव या बहाव कम होता है। भूमि के ऊपर घनी पत्तियाँ होने से वायु द्वारा मिट्टी का कटाव नहीं होता। हवा और पानी से कटाव रोककर भूमिसंरक्षण करने में घासें बड़ी सहायक होती हैं।
 
इसके अतिरिक्त घासों की जड़ों में आश्रय पानेवालेपाने वाले उपयोगी [[जीवाणु]] वहाँ से [[नाइट्रोजन]] संचित कर [[मिट्टी]] की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं तथा उनकी जड़ों द्वारा मिट्टी का विन्यास (texture) अत्यधिक उत्तम हो जाता है। इस प्रकार घासों द्वारा पथरीली या कम उपजाऊ भूमि भी अधिक उपजाऊ बनाई जा सकती है।
 
[[श्रेणी:वनस्पति विज्ञान]]