"स्वदेशी" के अवतरणों में अंतर

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आगे चलकर यही स्वदेशी आन्दोलन [[महात्मा गांधी]] के स्वतन्त्रता आन्दोलन का भी केन्द्र-बिन्दु बन गया। उन्होंने इसे "[[स्वराज]] की आत्मा" कहा।
== स्वदेशी का आधार ==
हमें यह समझना होगा कि देश में जो भी विकास अभी तक हुआ है, वह वास्तव में स्वदेशी के आधार पर ही हुआ है। कुल पूंजी निवेश में विदेशी पूंजी का हिस्सा २ प्रतिशत से भी कम है और वह भी गैर जरूरी क्षेत्रों में विदेशी पूंजी निवेश जाता है। आज चिकित्सा के क्षेत्र में भारत दुनिया का सिरमौर देश बन चुका है। इसके लिए जिम्मेदार विदेशी पूंजी नहीं, बल्कि भारतीय डाक्टरों की उत्कृष्टता है। आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र, जो पूरी तरह से भारतीय प्रौद्योगिकी के आधार पर विकसित हुआ है, ने दुनिया में अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ दिये हैं। आज दुनिया के जाने-माने देश भी अपने अंतरिक्ष यानों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करने के लिए भारतीय 'पी.एस.एल.वी.' का सहारा लेते हैं। सामरिक क्षेत्र में आणविक विस्फोट कर भारत पहले ही दुनिया को अचंभित कर चुका है। उधर अग्नि प्रक्षेपपास्त्र का निर्माण हमारे दुश्मनों को दहला रहा है। दुनियाभर में भारत के वैज्ञानिकों, डाक्टरों और इंजीनियरों ने अपनी धाक जमा रखी है। सरकार के तमाम दावों के बावजूद आयातों पर निर्भरता बढ़ने के बावजूद हमारे निर्यातों में वृद्धि नहीं हो रही, लेकिन हमारे सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की अथक मेहनत के कारण हमारे सॉफ्टवेयर के बढ़ते निर्यात सरकार की गलत नीतियों के बावजूद देश को लाभान्वित कर रहे हैं।
 
इन सभी क्षेत्रों में हमारी प्रगति किसी भी दृष्टिकोण से विदेशी निवेश और भूमंडलीकरण के कारण नहीं, बल्कि हमारे संसाधनों, हमारे वैज्ञानिकों और उत्कृष्ट मानव संसाधनों के कारण हो रही है। अभी भी समय है कि सरकार विदेशी निवेश के मोह को त्याग कर, स्वदेशी यानी स्वेदशी संसाधन, स्वदेशी प्रौद्योगिकी और स्वदेशी मानव संसाधनों के आधार पर विकास करने की मानसिकता अपनाए। आज जब अमरीका और यूरोप सरीखे सभी देश भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, तब भारत में स्वदेशी के आधार पर आर्थिक विकास ही एक मात्र विकल्प है।
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