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[[चित्र:Elias Howe sewing machine.png|thumb| सन १८४५ में विकसित एलियास होवे की सिलाई मशीन]]
 
'''सिलाई मशीन''' एक ऐसा यांत्रिक उपकरण है जो किसी वस्त्र या अन्य चीज को परस्पर एक धागे या तार से सिलने के काम आती है। इनका आविष्कार प्रथम [[औद्योगिक क्रांति]] के समय में हुआ था। सिलाई मशीनों से पहनने के सुंदर कपड़े छोटे-बड़े बैग, चादरें, पतली या मोटी रजाइयां सिली जाती हैं। सुंदर से सुंदर कढ़ाई की जाती है और इसी तरह बहुत कुछ किया जा सकता है।
 
दो हजार से अधिक प्रकार की मशीनें भिन्न-भिन्न कार्यों के लिए प्रयुक्त होती हैं जैसे कपड़ा, चमड़ा, इत्यादि सीने की। अब तो बटन टाँकने, काज बनाने, कसीदा का सब प्रकार की मशीनें अलग-अलग बनने लगी हैं। अब मशीन बिजली द्वारा भी चलाई जाती है।
 
[[चित्र:Sewingmachine04.jpg|thumb|200px|Needle plate, foot and transporter of a sewing machine]]
[[चित्र:Singer sewing machine detail1.jpg|thumb|200px|Singer sewing machine (detail 1)]]
 
 
 
सन्‌ 1849 ई. में एलान वी. विल्सन ने स्वतंत्र रूप से दूसरा आविष्कार किया। उसने एक घूमने वाले एवं तथा घूमने वाली बाबिन का आविष्कार किया जो ह्वीलर और विलसन मशीन का मुख्य आधार है। सन्‌ 1850 ई. में विल्सन उससे पेटेंट कराया। इसमें कपड़ा सरकाने वाला चार गति का यंत्र, तो प्रत्येक सीवन के बाद कपड़ा सरका देता था, मुख्य था। उसी समय ग्रोवर ने दुहरे श्रृंखला सीवन (Chain strip) की मशीन आविष्कार किया जो 'ग्रोवर ऐंड बेकर' मशीन का मुख्य सिद्धांत है। 1856 ई. में एक किसान गिब्स ने श्रृंखला सीवन की मशीन बनाई जिसका बाद में विलकाक्स ने सुधार किया और जो 'गिल्ड विलकाक्स' के नाम से प्रख्यात हुई। अब तो इसका बहुत कुछ सुधार हो चुका है।
 
=== भारत में सिलाई मशीन ===
भारत में भी उन्नीस
== सिलाई कैसे होती है? ==
मशीन की सिलाई में तीन प्रकार के सीवन प्रयोग में आते हैं-
* (1) इकहरा श्रृंखला सीवन,
* (2) दुहरा श्रृंखला सीवन,
* (3) दुहरी बखिया।
 
 
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