"स्पार्टा" के अवतरणों में अंतर

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पूरब के सिकंदर के अभियान के दौरान, स्पार्टा के राजा, एजिस III ने 333 ईसापूर्व में क्रेट में इस उद्देश्य से सेना-वाहिनी भेजी कि स्पार्टा के लिए द्वीप पर कब्ज़ा कर लिया जाएगा. अब की बार मेसेडॉन के खिलाफ एजिस ने संयुक्त यूनानी सेना की कमान स्वयं संभाली और 331 ई.पू. में मेगालोपॉलिस (Megalopolis) की नाकाबंदी में घिर जाने से पहले शुरूआती सफलताएं भी हासिल की. सेनापति एंटीपेटर (Antipater) के नेतृत्व में एक विशाल मैसिडॉनियन सेना-वाहिनी ने राहत पहुंचाने के मकसद से कुच किया और स्पार्टन की नेतृत्व वाली सेना को जोरदार कांटे की लड़ाई में पराजित किया। 5300 से भी अधिक स्पार्टन्स एवं उसके सहयोगी इस संग्राम में मारे गए तथा एंटीपेटर की 3500 सैनिकों की टुकड़ी भी मरने वालों में शामिल थी। एजिस, जो अब घायल हो चुका था तथा खड़े होने में असमर्थ था, ने अपने लोगों को आदेश दिया कि वे उसे पीछे छोड़कर आगे बढ़ती हुई, मैसिडॉनियन सेना का सामना करें ताकि पीछे हटने के लिए उसे उनसे थोड़ी मुहलत मिल जाय. और अंत में भाले से मारे जाने से पहले, स्पार्टा के राजा ने अपने घुटनों के बल खड़े होकर ही शत्रु के कई सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया.
 
यहां तक कि अपने पतन के दौरान भी, स्पार्टा ने "हेलेनिज्म का रक्षक" होने एवं लैकोनिक को तीक्षण बुद्धि अपने दावे को कभी भुला नहीं. इस संदर्भसन्दर्भ में एक उपाख्यान है कि जब फिलिप द्वितीय ने स्पार्टा को एक सन्देश में यह कह भेजा कि "अगर मैं लौकिनिया में प्रवेश कर जाता हूं तो मैं स्पार्टा को परास्त कर मिट्टी में मिला दूंगा," स्पार्टन्स ने इसके जवाब में सिर्फ एक शब्द कहा: "अगर".
 
जब फिलिप ने फारस के खिलाफ यूनान के एकीकरण के बहाने यूनानियों का संघ (लीग) बनाया, स्पार्टन्स ने उसमें शामिल नहीं होना चाहा - अखिल यूनानी अभियान में शामिल होने की उनकी कोई दिलचस्पी थी ही नहीं अगर यह स्पार्टन नेतृत्व के अंतर्गत नहीं होता है तो. हेरोडोटस के अनुसार मैसिडोनियंस डोरियन वंश के लोग थे जो स्पार्टन्स के ही सजातीय थे, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था। इस प्रकार फारस पर विजय प्राप्त करने के बाद सिकंदर महान ने एथेन्स को फारसी कवच वाले 300 सूट भेजे जिसके साथ यह शिलालेख भी था, "फिलिप का पुत्र सिकंदर एवं सभी यूनानी स्पार्टन को छोड़कर एशिया के रहने वाले विदेशियों से ली गई यह भेंट पेश करता है [अतिरीक्त महत्त्व दिया गया]".
राजाओं के कर्तव्य प्रारंभिक तौर पर धार्मिक, न्यायिक और सामरिक हुआ करते थे। वे राज्य के प्रधान पुरोहित तो थे ही और डेल्फियन अभयारण्य के साथ संचार-व्यवस्था भी बनाए रखते थे, जो स्पार्टन राजनीति में हमेशा अपने अधिकार का पूरा प्रयोग करता था। हेरोडोटस के काल में (लगभग 450 ई.पू.), उनके न्यायिक कार्यकालयों पर उत्तराधिकार, दत्तक-ग्रहण तथा सार्वजनिक सड़कों जनित मामलों में प्रतिबन्ध था। दीवानी और आपराधिक मामलों के फैसले इफॉर्स के रूप में माने जाने वाले अधिकारीयों के एक वर्ग के साथ ही साथ गेरुसिया कहलाने वाली वयोवृद्धों की परिषद् द्वारा किए जाते थे। गेरुसिया में 28 वयोवृस्द शामिल होते थे जिनकी उम्र 60 साल से ऊपर की होती थी, आजीवन सदस्यता के लिए निर्वाचित होते थे और आमतौर पर राजघरानों एवं दो राजाओं के हिस्से हुआ करते थे। राज्य के उच्चस्तरीय नीतिगत फैसलों पर इस परिषद् द्वारा विचार-विमर्श किया जाता था जो तब कहीं जाकर दामोस के विकल्प में कार्यवाई का प्रस्ताव पेश कर सकता था। दामोस स्पार्टन नागरिकों का सामूहिक अंग था जो मताधिकार के माध्यम से विकल्पों में से किसी एक का चुनाव कर सकता था।
 
अरस्तू ने स्पार्टा के राजतंत्र का वर्णन "एक प्रकार का असीमित एवं सतत सेनापतित्व" के रूप में किया है। (Pol. iii. I285a), जबकि सुकरात ने स्पार्टन को "अन्दर से कुलीनत्तंत्र के अधीन से लेकर अभियान के संचालन तब राजतंत्र" (iii 24) के रूप में संदर्भितसन्दर्भित किया है। हालांकि, यहां भी समयान्तराल से राजकीय विशेषाधिकारों में कटौती कर दी गई। फारसी युद्धों के समय से ही, राजा ने युद्ध की घोषणा करने का अधिकार खो दिया एवं पर्यवेक्षी अधिकारों के साथ दो मजिस्ट्रेट (इफोर्स) राजा पर नजर रखने के लिए रणक्षेत्र में साथ भेज दिए जाते थे। विदेश नीति के नियंत्रण में भी मनोनीत मजिस्ट्रेट (इफोर्स) द्वारा उसे पदस्वलित कर दिया जाता था।
 
समयान्तराल से, राजा सेना प्रधानो की क्षमता के अलावा केवल नामधारी शासक रह गए। वास्तविक क्षमता इफोर्स और गेरुसिया को स्थानांतरित कर दी गई।
हेलोट्स मूलतः मेस्सेनिया और लैकोनिया अंचल के रहने वाले स्वतंत्र ग्रीक थे जिन्हें स्पार्टन्स ने युद्ध में पराजित कर साथ ही साथ गुलाम बना लिया था। अन्य ग्रीक नगर-राज्यों में, स्वतंत्र नागरिक अंशकालिक सेनानी होते थे, जो युद्ध में व्यवहृत नहीं होने पर अन्य कामों में लगा दिए जाते थे। चूंकि स्पार्ती पूर्णकालिक सैनिक होते थे, इसलिए शारीरिक श्रम के कामों के लिए वे उपलब्ध नहीं थे। हेलोट्स का व्यवहार श्रमजीवी कृषि दासों के रूप में किया जाता था जो स्पार्टन की जमीन की जुताई करते थे। ग़ुलाम हेलोट महिलाएं अक्सर दाइयों के रूप में काम करती थीं। हेलोट्स पुरुष भी स्पार्ती सेना के साथ अयोधी सेवकों के रूप में यात्रा किया करते थे। थर्मोपाईले के युद्ध के अंतिम पड़ाव पर ग्रीक मृतकों में केवल सुविख्यात तीन सौ स्पार्टन सैनिक ही नहीं थे बल्कि सैकड़ों थेस्पियन तथा थेबन सैन्य-दस्तों के साथ एक बड़ी संख्या में हेलोट्स गुलाम भी थे।
 
हेलोट्स एवं उनके स्पर्ती स्वामियों के बीच रिश्ते अक्सर शत्रुतापूर्ण हो जाया करते थे। थूसाइडेड्स ने इस संदर्भसन्दर्भ में टिप्पणी की है कि "स्पार्टन नीति हमेशा से ही मुख्यतः हेलोट्स के खिलाफ सावधानियां बरतने की आवश्यकता पर ही नियंत्रित रही हैं।
 
मध्य ईसापूर्व 3 सदी के प्राइन के मायरॉन (Myron of Priene) के अनुसार,
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== संदर्भसन्दर्भ ==
* {{citation |last=Adcock |first=F.E. |title=The Greek and Macedonian Art of War |publisher=University of California Press |year=1957 |location=Berkeley |isbn=0520000056}}
* {{citation |last=Bradford |first=Ernle |authorlink=Ernle Bradford |title=Thermopylae: The Battle for the West |publisher=Da Capo Press |year=2004 |location=New York |isbn=0306813602}}