"खरगोन ज़िला" के अवतरणों में अंतर

88 बैट्स् जोड़े गए ,  6 वर्ष पहले
छो
बॉट: लाघव चिह्न (॰) का प्रयोग।
छो (117.212.241.71 (Talk) के संपादनों को हटाकर Sanjeev bot के आखिरी अवतरण को पूर्ववत क...)
छो (बॉट: लाघव चिह्न (॰) का प्रयोग।)
== भूगोल ==
[[खरगोन जिला]] मध्यप्रदेश की दक्षिणी पश्चिमी सीमा पर स्थित है। 21 अंश 22 मिनिट - 22 अंश 35 मिनिट (उत्तर) अक्षांश से 74 अंश 25 मिनिट - 76 अंश 14 मिनिट (पूर्व) देशांश के बीच यह जिला फैला है। इसका क्षेत्रफल लगभग 8030 वर्ग कि.मी.कि॰मी॰ है। इस जिले के उत्तर में [[धार]], [[इंदौर]] व [[देवास]], दक्षिण में [[महाराष्ट्र]], पूर्व में [[खण्डवा]], [[बुरहानपुर]] तथा पश्चिम में [[बड़वानी]] है। [[नर्मदा]] घाटी के लगभग मध्य भाग में स्थित इस जिले के उत्तर में विंध्याचल एवं दक्षिण में सतपुड़ा पर्वतश्रेणियां हैं। नर्मदा नदी जिले में लगभग 50 कि.मी.कि॰मी॰ बहती है। कुंदा तथा वेदा अन्य प्रमुख नदियां हैं। देजला-देवड़ा, गढ़ी गलतार, अंबकनाला तथा अपर वेदा प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं हैं। महेश्वर पनबिजली तथा सिंचाई योजना नर्मदा पर बनी तीन प्रमुख पनबिजली व सिंचाई योजनाओं में से एक है।
खरगोन जिला मुख्यालय के अक्षांश व देशांश क्रमशः 21°49'18" (उत्तर) तथा 75°37'10" (पूर्व) हैं। यह शहर औसत समुद्र सतह से लगभग 283 मीटर (± 9 मीटर) की ऊंचाई पर है।
== पड़ोसी-जिले ==
 
* [[बड़वानी जिला]] - खरगोन से 90 कि.मी.कि॰मी॰ दूर राज्य महामार्ग क्रमांक 27 (खण्डवा - खरगोन - बड़वानी - कुक्षी - वडोदरा गुजरात) पर बड़वानी जिला मुख्यालय बसा हुआ है।
** [[बावनगजा]] - बड़वानी से 10 कि.मी.कि॰मी॰ दूर एक अत्यंत प्रसिध्द जैन तीर्थस्थल।
* [[बुरहानपुर जिला]] - खरगोन से 130 कि.मी.कि॰मी॰ दूर बसा यह शहर पहले "दक्षिण का द्वार" कहलाता था। दिल्ली - मुंबई रेलमार्ग पर स्थित है।
** [[असीरगढ़]] - यह किला खरगोन से 100 कि.मी.कि॰मी॰ इंदौर - बुरहानपुर मार्ग पर है। इसे "दक्षिण की कुंजी" नाम से जाना जाता था।
* [[देवास जिला]] - खरगोन से 150 कि.मी.कि॰मी॰ दूर। बैंक नोट प्रेस तथा कई प्रसिद्ध औद्योगिक संस्थान ब कारखाने यहां हैं। रेल्वे स्टेशन है।
* [[धार जिला]] - यह शहर खरगोन से 130 कि.मी.कि॰मी॰ दूरी पर स्थित है।
** [[माण्डू]] (माण्डवगढ़) - खरगोन से लगभग 120 कि.मी.कि॰मी॰ दूर अत्यंत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल।
* [[इंदौर जिला]] - यह शहर खरगोन से 143 कि.मी.कि॰मी॰ दूर है। इंदौर को मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी भी कहा जाता है। यहां रेल्वे जंक्शन एवं हवाई अड्डा है।
* [[खण्डवा जिला]] - खरगोन से 90 कि.मी.कि॰मी॰ है। रेल्वे जंक्शन है। दिल्ली - मुंबई ब्रॉड गेज रेलमार्ग तथा दिल्ली - जयपुर - हैदराबाद मीटर गेज रेलमार्ग यहां से गुजरते हैं।
** [[ऊँकारेश्वर]] - यह स्थान खरगोन से 90 कि.मी.कि॰मी॰ दूर नर्मदा नदी के किनारे पर बसा है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग - श्री ममलेश्वर यहां स्थित है।
* [[उज्जैन जिला]] - खरगोन से 195 कि.मी.कि॰मी॰ दूर यह शहर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग - श्री [[महाकालेश्वर]] के लिये प्रसिद्ध है। पर्यटन स्थल एवं रेल्वे जंक्शन है।
* जळगाव ([[जलगांव जिला]]) एवं धुळै (धूलिया) - महाराष्ट्र के ये जिले खरगोन के पड़ौसी जिले है।
 
== पर्यटन ==
* '''[[खरगोन]]''' - जिला मुख्यालय - कुंदा नदी के तट पर बसा यह शहर अत्यंत प्राचीन नवग्रह मन्दिर के लिये प्रसिद्ध है। यह शहर इंदौर (रेल्वे / हवाई अड्डा) से 143 कि.मी., बड़वानी से 90 कि.मी.कि॰मी॰ (गुजरात से आते हुए - राज्य महामार्ग 26), सेंधवा से 70 कि.मी.कि॰मी॰ (महाराष्ट्र से आते हुए - आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), धामनोद से 65 कि.मी.कि॰मी॰ (इंदौर से आते हुए - आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग क्रं. 3), धार से 130 कि.मी., खण्डवा से 90 कि.मी.कि॰मी॰ तथा बुरहानपुर से 130 कि.मी.कि॰मी॰ दूरी पर है। यह शहर कपास एवं जिनिंग कारखानों का एक प्रमुख केन्द्र है।
* '''[[महेश्वर]]''' - यह शहर हैहयवंशी राजा सहस्रार्जुन, जिसने रावण को पराजित किया था, की राजधानी रहा है। ऋषि जमदग्नि को प्रताड़ित करने के कारण उनके पुत्र भगवान परषुराम ने सहस्रार्जुन का वध किया था। कालांतर में महान देवी अहिल्याबाई होल्कर की भी राजधानी रहा है। नर्मदा नदी के किनारे बसा यह शहर अपने बहुत ही सुंदर व भव्य घाट तथा माहेश्वरी साड़ियों के लिये प्रसिद्ध है। घाट पर अत्यंत कलात्मक मंदिर हैं जिनमे से राजराजेश्वर मंदिर प्रमुख है। आदिगुरु शंकराचार्य तथा पंडित मण्डन मिश्र का प्रसिद्ध शास्त्रार्थ यहीं हुआ था। यह जिले की एक तहसील का मुख्यालय भी है।
* '''[[मण्डलेश्वर]]''' - महेश्वर से 8 कि.मी.कि॰मी॰ दूर यह शहर भी नर्मदा के किनारे ही बसा है। नर्मदा पर जल-विद्युत परियोजना व बांध का निर्माण हुआ है। इस नगर में दत्त मंदिर राम मंदिर, गुप्तेश्वर मंदिर शीतला माता मंदिर काशी विश्वेवर मंदिर एंड छप्पन देव मंदिर अत्यंत प्राचीन होकर दर्शनीय है यहाँ फांसी बैड्डी नामक स्थान पर अनेक देशभक्तों को १८५७ की क्रांति के समय फांसी दी गयी ऐसी किवदंती है मण्डलेश्वर से ८ किमी के अंतर पर ग्राम चोली बड़ा ही ऐतिहासिक ग्राम है यहाँ पांडव युगीन महादेव का मंदिर बड़ा गणपति और चौसठ योगिनीं मंदिर इसकी प्राचीनता को बयां करते है|चोली नामक स्थान पर अत्यंत प्राचीन शिव-मंदिर है जहां पर बहुत भव्य शिव-लिंग स्थित है।
* '''[[ऊन, मध्य प्रदेश|ऊन]]''' - यह स्थान खरगोन से 14 कि.मी.कि॰मी॰ दूरी पर है। परमार-कालीन शिव-मंदिर तथा जैन मंदिरों के लिये यह स्थान प्रसिद्ध है। एक बहुत प्राचीन लक्ष्मी-नारायण मंदिर भी यहां स्थित है। खजुराहो के अलावा केवल यहीं परमार-कालीन प्रचीन मंदिर हैं।
* '''[[बकावां]]''' एवं '''[[रावेरखेड़ी]]''' - महान पेशवा बाजीराव की समाधी रावेरखेड़ी में स्थित है। उत्तर भारत के लिए एक अभियान के समय उनकी मृत्यु यहीं नर्मदा किनारे हो गई थी। बकावां में नर्मदा के पत्थरों को तराश कर शिव-लिंग बनाए जाते हैं।
* '''[[देजला]]'''-देवड़ा - कुंदा नदी पर एक बड़ा बांध है जिससे लगभग 8000 हेक्टेयर में सिंचाई होती है।
* '''[[सिरवेल महादेव]]''' - खरगोन से 55 कि.मी.कि॰मी॰ दूर इस स्थान के बारे मे मान्यता है कि रावण ने महादेव शिव को अपने दसों सर यहीं अर्पण किये थे। इसीलिये यह नाम पड़ा है। यह स्थान महाराष्ट्र की सीमा से बहुत ही पास है। महाशिवरात्रि पर म.प्र. एवं महाराष्ट्र से अनेक श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।
* '''[[नन्हेश्वर]]''' - खरगोन से 20 कि.मी.कि॰मी॰ दूर यह स्थान भी प्रचीन शिव-मंदिर के लिये प्रसिद्ध है। खरगोन से सिरवेल महादेव जाते समय यह स्थान रास्ते में है।
* '''[[बड़वाह]]''' व सनावद - ये जुड़वां शहर नर्मदा के दोनो ओर बसे हैं। उत्तर की ओर बड़वाह तथा दक्षिण की ओर सनावद है। ऊँकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने के लिये यहां से ही जाना पड़ता है। पुनासा में इंदिरा सागर जल-विद्युत परियोजना जाने क लिये भी सनावद के पास है। बड़वाह से मण्डलेश्वर, महेश्वर तथा धामनोद जाया जा सकता है। विश्वप्रसिद्ध लाल मिर्ची की मण्डी बैड़िया, सनावद के पास है।