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[[दरभंगा]] जिले सदर अनुमंडल के अंतर्गत अहियारी गाँव है, जो अहिल्या स्थान के नाम से विख्यात है। कमतौल रेलवे स्टेशन से उतरकर यहाँ पहुंचा जाता है। यह स्थान [[सीता]] की जन्मस्थली [[सीतामढ़ी]] से 40 कि मीकि॰मी॰ पूर्व में स्थित है। कहा जाता है कि ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा से इसी स्थान पर [[राम]] ने [[अहिल्या]] का उद्धार किया था।
 
डॉ राम प्रकाश शर्मा के अनुसार "इसमें कोई संदेह नहीं है कि अहिल्या-नगरी अथवा गौतम आश्रम मिथिला में ही था। भोजपुर में [[राम]] ने ताड़का -बध किया था। वहाँ सानुज [[राम]] ने ऋषि [[विश्वामित्र]] की यज्ञ की रक्षा उत्पाती राक्षसों का अपनी शक्ति से दमन कर की थी। [[मिथिला]] राज्य में प्रवेश कर पहले [[राम]] ने अहिल्या का उद्धार किया, और तत्पश्चात वहाँ से प्राग उत्तर दिशा (ईशान कोण) में चलकर वे ऋषि [[विश्वामित्र]] के साथ विदेह नागरी [[जनकपुर]] पहुंचे।<ref>[मिथिला का इतिहास, लेखक : डॉ राम प्रकाश शर्मा, प्रकाशक : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा, पृष्ठ संख्या : 455]</ref>