"आपेक्षिकता सिद्धांत": अवतरणों में अंतर

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== सामान्य आपेक्षिकता ==
:''मुख्य लेख: [[सामान्य आपेक्षिकता]]
सन १९०७ से १९११ के बीच आइन्स्टीन द्वारा विकसित '''आपेक्षिकता सिद्धान्त''' ही 'सामान्य आपेक्षिकता' के नाम से जाना जाता है।है।यह सिद्धान्त निम्नलिखित दो परिकल्पनाओं पर आधारित है-
विशेष*(१) आपेक्षिकता नियम, और
*(२)गुरुत्वाकर्षणीय तथा [[जड़त्व]] (इनर्शिया) पर आश्रित द्रव्यमानों की समानता।
मुख्य लेख: विशेष आपेक्षिकता
सोवियत संघ स्टांप अल्बर्ट आइंस्टीन के लिए समर्पित
 
लम्बाई, दिक् (स्पेस), काल, द्रव्यमान, ऊर्जा इत्यादि के विषय में भोतिकी में जो धारणाएँ थीं उनमें विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत ने सुधार किया। इनके अतिरिक्त भौतिकी के क्षेत्र में अन्य विषय हैं जो उतने ही महत्वपूर्ण हैं, किंतु उनका समावेश विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत में नहीं है। [[बल]] तथा [[विद्युतचुम्बकीय क्षेत्र|विद्युतचुम्बकीय क्षेत्रों]] में विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत का जैसा उपयोग हो सकता है वैसा [[गुरुत्वीय क्षेत्र]] में नहीं हो सकता। [[गुरुत्वाकर्षण]] भौतिकी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, अत: स्पष्ट है कि विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत को व्यापक बनाने की आवश्यकता है।
अन्तरिक्ष समय की संरचना के विशेष सापेक्षता सिद्धांत है। यह आइंस्टीन "चलती निकायों के विद्युत में" 1905 कागज में पेश (कई अन्य भौतिकविदों के योगदान के लिए विशेष सापेक्षता का इतिहास देखें). विशेष सापेक्षता दो पर आधारित है तत्वों जो शास्त्रीय यांत्रिकी में विरोधाभासी हैं:
 
द्रव्यमान का संबंध भौतिकी में दो प्रकार से आता है। किसी पिंड पर जब [[बल]] कार्य करता है तब पिंड का स्थान बदलता है और उसका [[वेग]] बदलता है। जब तक बल कार्य करता है तब तक पिंड को [[त्वरण]] मिलता है। यांत्रिकी के नियमों के अनुसार बल (F), पिंड का द्रव्यमान (m) और त्वरण (a) में निम्नलिखित संबंध है :
{{rquote|center|भौतिकी के नियम के नियमानुसार (आपेक्षिकता सिद्धांत) किसी जड़त्वीय निर्देश तंत्र के सापेक्ष गति कर रहे सभी पर्यवेक्षकों के लिए सभी भौतिक नियम समान होंगे।<br/>
समष्टि में सभी पर्यवेक्षकों के लिए प्रकाश का वेग समान रहता है, चाहे प्रकाश स्रोत उनके सापेक्ष गतिशील हो अथवा नहीं।}}
 
: ''''F = ma''' -- (१)
परिणामी सिद्धांत शास्त्रीय यांत्रिकी, जैसे की तुलना में बेहतर प्रयोग के साथ सहमत में Michelson मॉर्ले के प्रयोग है कि 2 मांगना का समर्थन करता है, लेकिन यह भी कई आश्चर्य की बात परिणाम है। इनमें से कुछ हैं:
 
इस समीकरण में जो द्रव्यमान '''m''' है उसको जड़त्व या आश्रित (अथवा अवस्थितित्वीय) द्रव्यमान कहते हैं। द्रव्यमान का दूसरा संबंध [[न्यूटन]] के गुरुत्त्वीय क्षेत्र में आता है। न्यूटन द्वारा दिये गये गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के अनुसार यदि दो द्रव्यमान, '''m1''' तथा '''m2''', दूरी '''d''' पर हों, तो उनके बीच में निम्नलिखित गुरुत्वाकर्षणीय बल '''F''' काम करेगा :
::समकालीनता के सापेक्षता: दो घटनाओं, एक पर्यवेक्षक के लिए एक साथ, एक और पर्यवेक्षक के लिए एक साथ नहीं हो सकता है अगर पर्यवेक्षकों सापेक्ष गति में हो सकता है।
चलती घड़ियों समय फैलाव: एक है पर्यवेक्षक "स्थिर" घड़ी से अधिक धीरे - धीरे टिकटिक मापा जाता है।
लंबाई संकुचन: ऑब्जेक्ट्स कि वे पर्यवेक्षक करने के लिए सम्मान के साथ आगे बढ़ रहे हैं दिशा में छोटा किया जा मापा जाता है।
मास - ऊर्जा तुल्यता: E=mc2 ऊर्जा और जन के बराबर है और जिसकी काया पलट हो सके हैं।
गति अधिकतम परिमित है: कोई भौतिक वस्तु, संदेश, या फ़ील्ड पंक्ति एक शून्य में प्रकाश की गति से तेजी से यात्रा कर सकते हैं।
 
: '''F = G m1 m2 / r<sup>2</sup>''' -- (२)
विशेष सापेक्षता के परिभाषित सुविधा Lorentz परिवर्तनों द्वारा शास्त्रीय यांत्रिकी के गलीली परिवर्तनों के प्रतिस्थापन है। (विशेष सापेक्षता विद्युत चुंबकत्व और परिचय के माक्सवेल 's समीकरण देखें).
 
इस समीकरण में '''G''' गुरुत्वाकर्षण स्थिरांक है। यदि हम '''m1''' को [[पृथ्वी]] का द्रव्यमान समझें और '''m2''' को धरती के पास स्थित किसी अन्य पिंड का द्रव्यमान समझें तो यह समीकरण द्रव्यमान '''m2''' का [[भार]] व्यक्त करेगा। न्यूटन की यांत्रिकी में गतिविज्ञान तथा गुरुत्वाकर्षण स्वतंत्र और भिन्न हैं, किंतु दोनों में ही द्रव्यमान का संबंध आता है। द्रव्यमान के इन दो स्वतंत्र तथा भिन्न विभागों में प्रयुक्त कल्पनाओं का एकीकरण आइंस्टाइन ने अपने सामान्य आपेक्षिकता सिद्धांत में किया। यह ज्ञात था कि जड़त्व पर आश्रित द्रव्यमान (समीकरण १) और गुरुत्वीय द्रव्यमान (समीकरण २) समान होते हैं। आइंस्टाइन ने द्रव्यमान की इस समानता का उपयोग करके गतिविज्ञान और गुरुत्वाकर्षण को एकरूप किया और सन् १९१५ ई. में व्यापक आपेक्षिकता सिद्धांत प्रस्तुत किया।
 
== इन्हें भी देखें ==