"सिद्धान्त शिरोमणि" के अवतरणों में अंतर

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इसके चार भाग हैं:
 
:(१) '''[[लीलावती]]''' - इसमें [[अंकगणित]] (मैथेमेटिक्स) का विवेचन किया गया है।
 
:(२) '''बीजगणित''' - इसमें [[बीजगणित]] (अल्जेब्रा) का विवेचन है।
 
:(३) '''[[ग्रहगणिताध्याय]]'''
 
:(४) '''[[गोलाध्याय]]'''
 
ग्रहगणिताध्याय और गोलाध्याय में [[खगोलशास्त्र]] का विवेचन है।
== सिद्धान्त शिरोमणि की एक झलक ==
 
(१) '''गुरुत्वाकर्षण'''—
 
: मरुच्चलो भूरचला स्वभावतो।
: यतो विचित्राः खलु वस्तुशक्तयः ॥ --- (सिद्धान्त शिरोमणि गोलाध्याय-भुवनकोष-5)
 
—(सिद्धान्त शिरोमणि गोलाध्याय-भुवनकोष-5)
 
वे पुनः कहते हैं-
 
:आकृष्यते तत्पततीव भाति।
:समेसमन्तात् क्व पतत्वियं खे ॥ --- (सिद्धान्त शिरोमणि गोलाध्याय-भुवनकोष-६)
 
—(सिद्धान्त शिरोमणि गोलाध्याय-भुवनकोष-६)
 
(२) '''धरती गोल है'''—
 
२) '''धरती गोल है'''—
 
:समो यत: स्यात्परिधेह शतान्श:।
 
:नरश्च तत्पृष्ठगतस्य कृत्स्ना।
:समेव तस्य प्रतिभात्यत: सा ॥ --- (सिद्धान्त शिरोमणि गोलाध्याय-भुवनकोष- १३)
 
—(सिद्धान्त शिरोमणि गोलाध्याय-भुवनकोष- १३)
 
== भाष्य ==