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पुरातत्व सिरसा
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(पुरातत्व सिरसा)
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सन् 1837 में अंग्रेजों ने भटियाणा जिला बनाकर सिरसा को मुख्यालय बना दिया। कैप्टन थोरासबी (सन् 1837 से 1839), ई. रोबिनसन (सन् 1839 से 1852) ई. रोबर्टसन (सन् 1852 से 1858) आदि सन 1884 तक इसके कलेक्टर रहे हैं। सन् 1857 में यहां से अंग्रेजों का सफाया कर दिया गया था। सन् 1884 में भटियाना तोड़कर सिरसा को तहसील बना दिया और हिसार जिले में मिला दिया। अकबर के शासन काल में यह हिसार सरकार (जिला) एक बड़ा परगना था। यहां ईंटों से निर्मित एक किला था तथा सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण था। इसके लिए 500 घुड़सवार और 5000 पैदल सैनिकों की फौज मुकर्रर थी। कुल 1 लाख 61 हजार 472 एकड़ रकबे से सलाना 1 लाख 9 हजार 34 रूपये राजस्व और 4078 रूपये (धर्मार्थ) की आय थी। सन् 1789 में प्राकृतिक प्रकोपवश मूल सिरसा नगर जो कि वर्तमान नगर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित था, खण्डहरात में परिवर्तित हो गया। लगभग पांच दशक पूर्व तक सिरसा शुष्क धूलभरी काली-पीली आंधियों का अद्र्धमरूभूमि क्षेत्र था। अत: सिरसा के विकास की कहानी इस रेगिस्तानी शुष्कता से हरियाली की कहानी कही जा सकती है। भाखड़ा डैम परियोजना के बाद इस रेगिस्तानी क्षेत्र के लहलहाते खेतों, बाग-बगीचों तथा बिजली में नहाते गांव जिले के विकास का कहानी दोहराते हैं। सिरसा का आध्यात्मिकता से अटूट संबंध है। अनेक संत-फकीरों की यह धरती चहुंओर से आध्यात्मिकता का शीतल प्रवाह समेटे हैं।
 
सिरसा और उसके आसपास का क्षेत्र, समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्‍कृतिक विरासत का स्‍वर्ग है। इसकी खोज, भारत के पुरातत्‍व सर्वे द्वारा घाघरा नदी के करीब 54 स्‍थलों पर खुदाई के बाद की गई। यह खोज, 1967 और 1968 में की गई थी। इस खोज में रंग महल संस्‍कृति की कई रंगों और कई डिजायन के ढ़ेर सारे बर्तन, कटोरे आदि प्राप्‍त हुए है।
सिरसा में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण द्वारा की गई खोज में तीन प्रमुख ऐतिहासिक स्‍थल निम्‍म है :
अरनियान वाली : यह स्‍थल, सिरसा के सिरसा भद्र रोड़ पर 8 किमी. दक्षिण में स्थित है जहां चार एकड़ जमीन और दस फुट ऊंचा टीला स्थित है, यहां मध्‍ययुगीन अवधि से संबंधित टूटी हुई मिट्टी के बर्तन के टुकड़े प्राप्‍त किए गए है।
सिंकदरपुर : सिरसा के पूर्व में लगभग 12 किमी. की दूरी पर दो टीले एक दूसरे से एक मील की दूरी पर स्थित है। इन खोजों में एक भारी पत्‍थर की स्‍लैब, इंद्र देवता की मूर्ति और भगवान‍ शिव की एकमुख लिंग के अलावा, मध्‍ययुगीन काल के मंदिर के नमूने और रंग महल के दौर के मिट्टी के बर्तन भी पाएं गए थे।
सुचान : यह सिरसा से पूर्व में 16 किमी. की दूरी पर स्थित है, यहां के टीले में मध्‍यकालीन युग के बर्तनों के टुकड़े मिले
 
इसके साथ रेजीडेन्शियल सैक्टर में भी रीयल एस्टेट और टाऊनशिप में भी सिरसा के बढ़ते कदम साफ दिखाई दे रहे हैं। ईरा ग्रुप, ग्लोबल स्पेस तथा हुड्डा सैक्टर व शहर की प्राईवेट कॉलोनियां डेवैलप्मैंट में पूरा योगदान कर रहे हैं। इससे सिरसा में प्रोपर्टी डीलरों की बाढ़ सी आ गई लगती है। खेल और साहित्य के क्षेत्र में सिरसा ने बहुत तरक्की की है। खेलों में भारतीय हॉकी टीम ने अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी सरदारा सिंह (संतनगर) और हरप्रीत सिंह जैसे धुरंधर खिलाड़ी दिए हैं, जो सिरसा ही नहीं, देश व एशिया के लिए गौरव की बात है, क्योंकि वल्र्ड इलेवन टीम में शामिल होने वाला सरदारा सिंह एशिया महाद्वीप का एकमात्र खिलाड़ी है। वो वर्ष 2008 में भारतीय टीम का कप्तान भी रहा है। रस्साकशी में जिले के गांव हरिपुरा की टीम सात बार राष्ट्रीय चैंपियन रह चुकी है। वर्ष 2011 में सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में देश में टॉप रहने वाली डेरा सच्चा सौदा में अध्ययन कर रही गुरअंश ने 2010 में फरीदाबाद में शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर सिरसा का नाम रोशन किया है।
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