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[[चित्र:Odysseus Polyphemos Cdm Paris 190.jpg|200px|thumb|right|ओडेसी का प्राचीन ज़ूनानी निदर्श चित्र]]
[[चित्र:Odysseus from Schwab book 1.jpg|right|thumb|300px|अपने शत्रुओं पर तीर चलाते हुए '''ओदिसियस''']]
'''ओदिसी''' ([[प्राचीन यूनानी भाषा]] : Ὀδυσσεία ''Odusseia'') , [[होमर]]कृत दो प्रख्यात यूनानी [[महाकाव्य|महाकाव्यों]] में से एक है। [[ईलियद]] में होमर ने [[ट्राजन युद्ध]] तथा उसके बाद की घटनाओं का वर्णन किया है जबकि ओदिसी में ट्राय के पतन के बाद ईथाका के राजा ओदिसियस की, जिसे यूलिसीज़ नाम से भी जाना जाता है, उस रोमांचक यात्रा का वर्णन है जिसमें वह अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए, 10 वर्ष बाद अपने घर पहुँचता है।
ओडेसी ई.पू. आठवीं शताब्दी में लिखी गयी है। यह कहाँ लिखी गई इस संबंध में माना जाता है कि यह इस समय के यूनान अधिकृत में सागर तट आयोनिया में लिखी गई जो अब टर्की का भाग है।<ref>{{cite book |last=Rieu |first=D.C.H. |title= ''The Odyssey''|year=२००३|publisher=पेंगुइन|location=|id= |page=''xi'' |accessday= |accessmonth= मई|accessyear=}}</ref>
 
==कथानक==
[[चित्र:Odysseus from Schwab book 1.jpg|right|thumb|300px|अपने शत्रुओं पर तीर चलाते हुए '''ओदिसियस''']]
ओदेसी में '''ओडेस''' या '''उलीस''' नाम के एक पौराणिक नायक के [[ट्रॉय का युद्ध|ट्रॉय के युद्ध]] के बाद मातृभूमि वापस लौटते समय घटने वाले साहसपूर्ण कार्यों की गाथा कही गयी है। जिस प्रकार हिंदू [[रामायण]] में लंका विजय की कहानी पढ़कर आनंदित होते हैं। उसी प्रकार ओडिसी में यूनान वीर यूलीसिस की कथा का वर्णन आनंदमय है। ट्राय का राजकुमार स्पार्टा की रानी हेलेन का अपहरण कर ट्राय नगर ले गया। इस अपमान का बदला लेने के लिए यूनान के सभी राजाओं और वीरों ने मिलकर ट्राय पर आक्रमण किया। पर न नगर का फाटक टूटा और न प्राचीर ही लाँघी जा सकी। अंत में यूनानी सेना ने एक चाल चली। एक लकड़ी का खोखला घोड़ा पहिएयुक्‍त पटले पर जड़ा गया। उसे छोड़ वे अपने जहाजों से वापस लौट गए। ट्रॉय के लोगों ने सोचा कि यूनानी अपने देवता की मूर्ति छोड़कर निराश हो चले गए। वे उसे खींचकर नगर में लाए तो मुख्‍यद्वार के मेहराब को कुछ काटना पड़ा। रात्रि को जब ट्रॉय खुशियॉँ मना रहा था, खोखली अश्‍व मूर्ति से यूनानी सैनिकों ने निकलकर चुपचाप ट्रॉय का फाटक खोल दिया। ग्रीक सेना, जो वापस नहीं गई थी बल्कि पास में जाकर छिप गई थी, ट्रॉय में घुस गई।<ref>{{cite web |url= http://v-k-s-c.blogspot.com/2009/01/human-rights-ancient-times-other.html|title=अन्य देशों में मानवाधिकार और स्वत्व |accessmonthday=[[२२ अप्रैल]]|accessyear=[[२००९]]|format=एचटीएमएल|publisher=मेरी कलम|language=}}</ref> एक हेलेन के पीछे ट्रॉय नष्‍ट हो गया ठीक वैसे ही जैसे सीता के पीछे रावण की स्‍वर्णमयी लंका नष्‍ट हुई थी। इसी से अंग्रेजी में ‘द ट्रॉजन हॉर्स’ का मुहावरा बना। ‘ओडेसी’ मनीषी ग्रीक कप्‍तान ओडेसस की साहसिक वापसी यात्रा की गाथा है। ट्राय से लौटते समय उनका जहाज तूफान में फस गया। वह बहुत दिनों तक इधर उधर भटकता रहा। इसके बाद अपने देश लौटा।
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'''मंगलाचरण''' - हे देवी, तू उस कुशल मानव ओडेसियस की कथा गाने की शक्ति दे जिसने ट्राय के दुर्ग को धराशायी कर दिया और जो सारे संसार में भटकता रहा, जिसने विविध जातियों और नगरों को देखा तथा उत्ताल समुद्र की लहरों पर प्राणों की रक्षा के लिए घोर कष्ट सहन किया।
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