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(→‎पर्यटन स्थल: सिंघिया)
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== पर्यटन स्थल ==
 
* '''सिंघिया''': माना जाता है की गोस्वामी लक्ष्मीनाथ जी महाराज यही पे समाधी लिए थे जिनका ख़ड़ाम बाहर ही रह गया था जो आज भी सुरछित रखा गया है।
माना जाता है कि बाबा ने ये आशीर्वाद दिया था की जब किसी भी घर में भीषण आग क्यूं न लगे पर उससे पड़ोस का घर न जलेगा जो आज भी कायम है।
यहाँ माँ भगवती का बहोत ही पुरानी मूर्ति है।
यही पे चिलवारा चर् भी है जो पुरे बिहार का सबसे बड़ा चर् है यहाँ की मछलियां बहुत ही स्वादिष्ट होती है।
* morwara
* '''विद्यापतिनगर''': शिव के अनन्य भक्त एवं महान मैथिल कवि [[विद्यापति]] ने यहाँ [[गंगा]] तट पर अपने जीवन के अंतिम दिन बिताए थे। ऐसी मान्यता है कि अपनी बिमारी के कारण विद्यापति जब गंगातट जाने में असमर्थ थे तो [[गंगा]] ने अपनी धारा बदल ली और उनके आश्रम के पास से बहने लगी। वह आश्रम लोगों की श्रद्धा का केंद्र है।