"प्रकाश का वेग": अवतरणों में अंतर

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इस प्रकार इन सब विधियों से निकाले हुए प्रकाशवेग के मानों का अध्ययन कर हम कह सकते हैं कि सबसे यथार्थ प्रकाशवेग मान 2,99,793.0 किमी. प्रति सेकंड है।
 
==तात्पर्यटीका में प्रकाश का वेग==
[[वाचस्पति मिश्र]] द्वारा रचित [[तात्पर्यटीका]] में प्रकाश के वेग, और उसके द्वैत स्वभाव का उल्लेख है।
 
[[सायण|सायणाचार्य]] ने प्रकाश के वेग का उल्लेख कुछ इस प्रकार किया है-
: ''योजनानां सहस्रे द्वे द्वे शते द्वे च योजने ।''
: ''एकेन निमिषार्धेन क्रममाण नमोऽस्तु ते ॥''
: '' अर्थात् आधे [[निमेष]] में 2202 [[योजन]] का मार्गक्रमण करने वाले प्रकाश तुम्हें नमस्कार है ।'' इसमें निमेष और योजन को सेकेण्ड तथा किमी में बदलने पर प्रकाश का वेग 299,938.5 km / s आता है जो वर्तमान में मापे गये प्रकाश के वेग (299792458 मी/सेकेण्ड) के बहुत समीप है।<ref<[http://www.infinityfoundation.com/mandala/t_es/t_es_kak-s_light_frameset.htm Light or Coincidence?] by Subhash Kak, PhD</ref>
 
== सन्दर्भ ==