"अनेकांतवाद" के अवतरणों में अंतर

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सिद्धांत को समझने के लिए हाथी और पांच अंधों की कहानी इस लेख में जरूर होनी चाहिए जो मैंने डाली है।
छो (सिद्धांत को समझने के लिए हाथी और पांच अंधों की कहानी इस लेख में जरूर होनी चाहिए जो मैंने डाली है।)
''’अनेके अन्ता धर्मा यत्र सोऽनेकान्तः’'' [[नयवाद]] के आधार पर की है। नयवाद अनेकान्त का मूल आधार है।
 
अनेकान्तवाद को एक हाथी और पांच अंधों की कहानी से बहुत ही सरल तरीके से समझा जा सकता है। पांच अंधे एक हाथी को छूते हैं और उसके बाद अपने-अपने अनुभव को बताते हैं। एक अंधा हाथी की पूंछ पकड़ता है तो उसे लगता है कि यह रस्सी जैसी कोई चीज है, इसी तरह दूसरा अंधा व्यक्ति हाथी की सूंड़ पकड़ता है उसे लगता है कि यह कोई सांप है।
इसी तरह तीसरे ने हाथी का पांव पकड़ा और कहा कि यह खंभे जैसी कोई चीज है, किसी ने हाथी के कान पकड़े तो उसने कहा कि यह कोई सूप जैसी चीज है, सबकी अपनी अपनी व्याख्याएं। जब सब एक साथ आए तो बड़ा बवाल मचा। सबने सच को महसूस किया था पर पूर्ण सत्य को नहीं, एक ही वस्तु में कई गुण होते हैं पर हर इंसान के अपने दृष्ठिकोण की वजह से उसे वस्तु के कुछ गुण गौण तो कुछ प्रमुखता से दिखाई देते हैं। यही अनेकान्तवाद का सार है।
==इन्हें भी देखें==
* [[स्यादवाद]]