"वैदिक सभ्यता" के अवतरणों में अंतर

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=== उपनिषद ===
उपनिषद प्राचीनतम दार्शनिक विचारों का संग्रह है। उपनिषदों में ‘[[वृहदारण्यक|वृहदारण्यक’]] तथा ‘[[छान्दोन्य|छान्दोन्य’]],
<nowiki> </nowiki>सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं। इन ग्रन्थों से बिम्बिसार के पूर्व के भारत की
अवस्था जानी जा सकती है। परीक्षित, उनके पुत्र जनमेजय तथा पश्चातकालीन
राजाओं का उल्लेख इन्हीं उपनिषदों में किया गया है। इन्हीं उपनिषदों से यह
स्पष्ट होता है कि आर्यों का दर्शन विश्व के अन्य सभ्य देशों के दर्शन से
सर्वोत्तम तथा अधिक आगे था। आर्यों के आध्यात्मिक विकास, प्राचीनतम धार्मिक
<nowiki> </nowiki>अवस्था और चिन्तन के जीते-जागते जीवन्त उदाहरण इन्हीं उपनिषदों में मिलते
हैं।
 
 
'''धातु एवं सिक्के'''&#32;:
<nowiki> </nowiki>ऋग्वेद में उल्लेखित धातुओं में सर्वप्रथम धातू, अयस (ताँबा या कांसा) था।
<nowiki> </nowiki>वे सोना (हिरव्य या स्वर्ण) एवं चांदी से भी परिचित थे। लेकिन ऋग्वेद में
लोहे का उल्लेख नहीं है। ' निष्क ' संभवतः सोने का आभूषण या मुद्रा था जो
विनिमय के काम में भी आता था।
 
'''उद्योग'''&nbsp;:
<nowiki> </nowiki>ऋग्वैदिक काल के उद्योग घरेलु जरूरतों के पूर्ति हेतु थे। बढ़ई एवं धूकर
का कार्य अत्यन्त महत्वपूर्व था। अन्य प्रमुख उद्योग वस्त्र, बर्तन, लकड़ी
एवं चर्म कार्य था। स्त्रियाँ भी चटाई बनने का कार्य करतीं थीं।
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