"रामधारी सिंह 'दिनकर'" के अवतरणों में अंतर

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तो दे दो केवल पाँच ग्राम,रक्खो अपनी धरती तमाम।(रश्मिरथी / तृतीय सर्ग / भाग 3)
 
जब नाश मनुज पर छाता है,पहले विवेक मर जाता है।(रश्मिरथी / तृतीय सर्ग / भाग 3)''<nowiki/>''
 
= रश्मिरथी / तृतीय सर्ग / भाग 3 =
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