"आंग सान सू की" के अवतरणों में अंतर

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{{स्रोतहीन|date=सितंबर 2014}}
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|name = ऑंन्ग सैन सू की
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|image = Remise du Prix Sakharov à Aung San Suu Kyi Strasbourg 22 octobre 2013-18.jpg
|name= आंग सान सू की
|office1 = अध्यक्ष - [[नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी]]
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|caption= दॉ आंग सान सू की
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|birth_place=[[रंगून]], [[ब्रिटिश बर्मा]]
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|known_for = नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की नेता, [[नोबेल शांति पुरस्कार]] विजेता
|office3 = नेता विपक्ष (म्यामांर की लोक सभा)
|occupation =चयनित प्रधानमंत्री
|president3 = थीन सीन
|residence = रंगून
|term_start3 = 2 मई 2012
|religion = [[थेरवाद|थेरवादी बौद्ध]]
|term_end3 = 16 नवंबर 2015
|predecessor3 = साई ऐ पाओ
|successor3 = हटे ऊ
|office4 = प्रतिनिधि सभा म्यामांर (बर्मा) (कवहमु टाउनशिप)
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|birth_date = 19-जून-1945
|birth_place = [[यांगून]] (रंगून), बर्मा
|death_date =
|death_place =
|party = नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी
|spouse = माइकल ऐरिस (1971–1999)
|children = अलेक्जेंडर ऐरिस
|alma_mater = [[लेडी श्री राम कॉलेज]] | [[दिल्ली विश्वविद्यालय]],</br> सेंट ह्यूग कॉलेज, ऑक्सफोर्ड ([[लंदन विश्वविद्यालय]])
|religion = [[थेरवाद]] (बौद्ध धर्म)
|awards = [[नोबेल शांति पुरस्कार]], </br>[[जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार]], </br>भगवान महावीर विश्व पुरस्कार
|signature = Aung San Suu Kyi signature 2013.svg
}}
'''आंग सान सू की''' [[म्यांमार]] (बर्मा) में लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्ष कर रही प्रमुख राजनेता हैं। [[१९ जून]] [[१९४५]] को रंगून में जन्मी आंग सान लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई प्रधानमंत्री, प्रमुख विपक्षी नेता और म्यांमार की नेशनल लीग फार डेमोक्रेसी की नेता हैं। आंग सान को १९९० में राफ्तो पुरस्कार व विचारों की स्वतंत्रता के लिए सखारोव पुरस्कार से और १९९१ में [[नोबेल शांति पुरस्कार]] प्रदान किया गया है। १९९२ में इन्हें अंतर्राष्ट्रीय सामंजस्य के लिए भारत सरकार द्वारा [[जवाहर लाल नेहरू पुरस्कार]] से सम्मानित किया गया। लोकतंत्र के लिए आंग सान के संघर्ष का प्रतीक बर्मा में पिछले २० वर्ष में कैद में बिताए गए १४ साल गवाह हैं। बर्मा की सैनिक सरकार ने उन्हें पिछले कई वर्षों से घर पर नजरबंद रखा हुआ था। इन्हें १३ नवम्बर २०१० को रिहा किया गया है।<ref>{{cite web| url = http://navbharattimes.indiatimes.com/thoughts-platform/focus/--/articleshow/6921100.cms |title =संघर्ष के मायने बदलतीं 'आंग सान सू की' ||publisher = [[नवभारत टाइम्स]] |date = 14 नवम्बर 2010, 02.14AM IST |accessdate = 7 जून 2013}}</ref>
 
== निजी ज़िंदगी ==
आंग सान सू १९ जून १९४५ को [[रंगून]] में पैदा हुईं थीं। इनके पिता आंग सान ने आधुनिक बर्मी सेना की स्थापना की थी और [[संयुक्त राजशाही|युनाईटेडयुनाइटेड किंगडम]] से १९४७ में बर्मा की स्वतंत्रता पर बातचीत की थी। इसी साल उनके प्रतिद्वंद्वियों ने उनकी हत्या कर दी। वह अपनी माँ, खिन कई और दो भाइयों आंग सान लिन और आंग सान ऊ के साथ रंगून में बड़ी हुई।
नई बर्मी सरकार के गठन के बाद सू की की माँ खिन कई एक राजनीतिक शख्सियत के रूप में प्रसिद्ध हासिल की। उन्हें १९६० में भारत और नेपाल में बर्मा का राजदूत नियुक्त किया गया। अपनी मां के साथ रह रही आंग सान सू की ने लेडी श्रीराम कॉलेज, [[नई दिल्ली]] से १९६४ में [[राजनीति विज्ञान]] में स्नातक हुईं। सू की ने अपनी पढ़ाई सेंट ह्यूग कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में जारी रखते हुए दर्शन शास्त्र, राजनीति शास्त्र और अर्थशास्त्र में १९६९ में डिग्री हासिल की। स्नातक करने के बाद वह न्यूयॉर्क शहर में परिवार के एक दोस्त के साथ रहते हुए [[संयुक्त राष्ट्र]] में तीन साल के लिए काम किया। १९७२ में आंग सान सू की ने [[तिब्बती संस्कृति]] के एक विद्वान और [[भूटान]] में रह रहे डॉ॰ माइकल ऐरिस से शादी की। अगले साल [[लंदन]] में उन्होंने अपने पहले बेटे, अलेक्जेंडर ऐरिस, को जन्म दिया। उनका दूसरा बेटा किम १९७७ में पैदा हुआ। इस के बाद उन्होंने लंदन विश्वविद्यालय के स्कूल ओरिएंटल और अफ्रीकन स्टडीज में से १९८५ में पीएच.डी. हासिल की।
 
 
२ मई २००८ को चक्रवात नरगिस के बर्मा में आए कहर की वजह से सू की का घर जीर्णशीर्ण हालात में है, यहां तक रात में उन्हें बिजली के अभाव में मोमबत्ती जलाकर रहना पड़ रहा है। उनके घर की मरम्मत के लिए अगस्त २००९ में बर्मी सरकार ने घोषणा की।
==सन्दर्भ==
== टिप्पणी ==
{{टिप्पणीसूची}}
* {{cite web | url = http://khabar.ndtv.com/news/show/aung-san-suu-kyi-makes-history-with-parliamentary-oath-20644 | title= सू ची ने सांसद के रूप में शपथ ली | publisher = एन॰डी॰टी॰वी॰ | date = मई 2, 2012 04:42 PM IST | accessdate = 7 जून 2013}}</ref>
 
[[श्रेणी:व्यक्तिगत जीवन|की, आंग सान सू]]
[[श्रेणी:1945 में जन्मे लोग]]
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