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उनके ग्रंथ निम्नलिखित हैं:
 
1. उमास्वाति [[तत्वार्थ सूत्र]] की टीका तत्वार्थवार्तिक जो राजवार्तिक के नाम से प्रसिद्ध है। इस वार्तिक के भाष्य की रचना भी स्वयं अकलंक ने की है।
 
2. आप्त मीमांसा की टीका अष्टशती।