"शारदा देवी" के अवतरणों में अंतर

414 बैट्स् जोड़े गए ,  6 वर्ष पहले
छो
 
=== दक्षिणेश्वर मेँ ===
[[चित्र:Nahabat of Dakshineswar Kali Temple.jpg|thumb | right |दक्षिणेश्वर स्थित नहबत का दक्षिणी भाग, शारदा देवी यहाँ एक छोटीछोटे सीसे कमरे मेँ रहती थीँ ]]
अठारह वर्ष की उम्र मेँ वहवे अपने पति रामकृष्ण से मिलने दक्षिणेश्वर पहुचीँ। रामकृष्ण इस समय कठिन आध्यात्मिक साधना मेँ बारह बर्ष से ज्यादा समय व्यतीत कर चुके थे और आत्मसाक्षातकारआत्मसाक्षात्कार के सर्बोच्च स्तर को प्राप्त कर लिएलिया थे।था। वेउन्होने बड़े प्यार से शारदा कोदेवी का स्वागत कर उन्हे सहज रूप से ग्रहण कियेकिया और गृहस्थी के साथ साथ आध्यात्मिक जीवन व्यतीत करने की शिक्षा भी दिये।दी। शारदा देवी पवित्र जीवन व्यतीत करते हुए, एवं रामकृष्ण की शिष्या बनकी तरह आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करते हुए अपने दैनिक दायित्व का निर्वाह करने लगीं गई।
रामकृष्ण शारदा को जगन्माता के रुप मेँ देखते थे। 1872 ई. के फलाहारीणी [[काली]] पूजा की रात को वेउन्होने शारदा कोकी जगन्माता के रुप मेँ पूजा किये।की।
दक्षिणेश्वर मेँ आनेबाले शिष्य भक्तोँ को शारदा देवी अपने बच्चोँ के रुप मेँ देखती थीथीं और उनकी सेवाबच्चों के समान देखभाल करती थी।थीं ।<br />
 
शारदा देवी का दिन प्रातः ३:०० बजे शुरू होता था। गंगास्नान के बाद वे [[जप ]] और [[ध्यान ]] करती थी।थीं। रामकृष्ण ने उन्हें दिव्य मंत्र सिखाये थे और लोगो को दीक्षा देने और उन्हें आध्यात्मिक जीवन में मार्गदर्शन देने हेतु ज़रूरी सुचना भी दी थी। शारदा देवी को श्री रामकृष्ण की प्रथम शिष्या के रूप में देखा जाता हैं। अपने ध्यान में दिए समय के इलावा , वे बाकी का समय रामकृष्ण और भक्तो (जिनकी संख्या बढ़ती जा रही थी ) के लिए भोजन बनाने में व्यतीत करती थी।थीं।
 
=== संघ माता के रुप मेँ ===
14

सम्पादन