"जैन धर्म में भगवान" के अवतरणों में अंतर

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जैन धर्म में अरिहन्त और सिद्ध ही भगवान है। देवी, देवताओं जो स्वर्ग में है वह अपने अच्छे कर्मों के कारण वहाँ है और भगवान नहीं माने जा सकते। यह देवी, देवता  एक निशित समय के लिए वहाँ है और यह भी मरण उपरांत मनुष्य बनकर ही मोक्ष जा सकते है।
 
== भगवान कीका परिभाषास्वरुप ==
 
[[आचार्य समन्तभद्र]] विरचित प्रमुख [[जैन ग्रंथ]], [[रत्नकरण्ड श्रावकाचार]] के दो श्लोक सच्चे देव का स्वरुप बताते हैं:
 
:आप्तेनो च्छिनदोषेण सर्वज्ञेनागमेशिना।