"याज्ञवल्क्य" के अवतरणों में अंतर

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अब तक इसकी दो शाखायें प्राप्‍त होती है जो कि‍ पूर्व में 15 हुआ करती थी। प्राप्‍त शाखाआें में प्रथम है माध्‍यन्‍दि‍न तथा द्वि‍तीय है काण्‍व।
 
==== माध्‍यन्‍दि‍न शाखा ====
इस शाखा का प्रचार प्रसार सम्‍प्रति‍ उत्‍तर भारत में प्रायश: सर्वत्र देखने में आता है। इस शाखा की संहि‍ता पर आचार्य महीधर, आचार्य उव्‍वट, स्‍वामी दयानन्‍द सरस्‍वती, पूज्‍यपाद श्री करपात्र स्‍वामी तथा श्रीपाददामोदर सातवलेकर की व्‍याख्‍या महत्‍वपूर्ण है।
=== शतपथ ब्राह्मण ===
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