"पुरुषार्थ सिद्धयुपाय" के अवतरणों में अंतर

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पुरुषार्थ सिद्धयुपाय में अहिंसा के सिद्धांत को विस्तार से समझाया गया हैं {{साँचा:Sfn|Jain|2012|p = 33-34}} इसमें श्रावक को हिंसा आदिक पापों से सावधान भी किया गया हैं।{{साँचा:Sfn|Jain|2012|p = 55-60}}
 
==इन्हें भी देखें==
== See also ==
* [[तत्त्वार्थ सूत्र]]
 
==सन्दर्भ==
== Notes ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{Reflist|2}}
 
== सन्दर्भ ग्रन्थ ==
== References ==
* {{साँचा:Citation|url = http://books.google.com/?id=CLEVAQAAIAAJ|title = The Sacred Books of the Jainas|first1 = Uggar|last1 = Sain|author2 = Sital Prasad (Brahmachari)|year = 1931}}
* {{साँचा:Citation|url = http://books.google.com/?id=4iyUu4Fc2-YC&pg=PR14|title = Acharya Amritchandra's Purushartha Siddhyupaya|isbn = 9788190363945|last = Jain|first = Vijay K.|year = 2012}}