"मेंहदीपुर बालाजी" के अवतरणों में अंतर

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इस प्रकार तीनों देवों की स्थापना हुई। वि.सं. १९७९ में श्री महाराज ने अपना चोला बदला। उतारे हुए चोले को गाड़ियों में भर कर श्री गंगा में प्रवाहित करने हेतु बहुत से आदमी चल दिए। चोले को लेकर जब मंडावर रेलवे स्टेच्चन पर पहुंचे तो रेलवे अधिकारियों ने चोले का लगेज तय करने हेतु उसे तोला किंतु वह तुलने में ही नहीं आया। कभी एक मन बढ जाता तो कभी एक मन घट जाता। अंत में हार कर चोला वैसे ही गंगा जी को सम्मान सहित भेज दिया गया। उस समय हवन, ब्राह्मण भोजन एवं धर्म ग्रंथों का पारायण हुआ और नए चोले में एक नई ज्योति उत्पन्न हुई जिसने भारत के कोने-कोने में प्रकाच्च फैला दिया।
 
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://spiritualworld.co.in/religious-songs-and-vrat-kathayen/hindu-aarti-collection/shri-pretraj-sarkar-ji-ki-aarti-in-hindi-and-engli श्री प्रेतराज सरकार जी की आरती]
 
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