"अखिल भारतीय मुस्लिम लीग" के अवतरणों में अंतर

(बर्बरता हटाया)
ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का गठन १९०६ में ढाका स्थान पर अमल में आया। महमडिं शैक्षणिक सम्मेलन के वार्षिक अधिवेशन के समाप्त होने पर उपमहाद्वीप के विभिन्न राज्यों से आए मुस्लिम ईतिदीन ने ढाका नवाब सलीम अल्लाह खान की निमंत्रण पर एक विशेष सम्मेलन की। बैठक में फैसला किया गया कि मुसलमानों की राजनीतिक मार्गदर्शन के लिए एक राजनीतिक पार्टी का गठन किया जाए. याद रहे कि सर सैय्यद ने मुसलमानों को राजनीति से दूर रहने का सुझाव दिया था। लेकिन बीसवीं सदी के आरंभ से कुछ ऐसी घटनाओं उत्पन्न होने शुरू हुए कि मुसलमान एक राजनीतिक मंच बनाने की जरूरत महसूस करने लगे। ढाका बैठक की अध्यक्षता नवाब प्रतिष्ठा आलमलك ने की। नवाब मोहसिन आलमल कि; मोलानामहमद अली जौहर, मौलाना जफर अली खान, हकीम अजमल खां और नवाब सलीम अल्लाह खान समेत कई महत्त्वपूर्ण मुस्लिम आबरीन बैठक में मौजूद थे। मुस्लिम लीग का पहला राष्ट्रपति सर आग़ा खान को चुना गया। केंद्रीय कार्यालय अलीगढ़ में स्थापित हुआ। सभी राज्यों में शाखाएं बनाई गईं. ब्रिटेन में लंदन शाखा का अध्यक्ष सैयद अमीर अली को बनाया गया।<ref>[http://www.pakstudy.com/index.php?topic=17592.0 ऑल इंडिया मुस्लिम लीग का गठन]</ref>
 
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== मुस्लिम लीग की स्थापना के कारणों ==
हिंदू भेदभाव: हिन्दू ज़हनयत हमेशा भेदभाव से पर है हिन्दू मुसलमानों को खुद से कम जानते थे मुसलमानों ने उन पर क्योंकि कई सौ साल सरकार की थी इसलिए वह मुसलमानों से बदला लेना चाहते थे हिन्दोस्तां अपने बाप की जागीर और भारतीय की राज गद्दी को अपनी माँ का मंगल सूत्र विचार करते थे वह मुसलमानों को अस्तित्व बुर दाशत नहीं कर सकते थे उनका दावा था कि या तो मुसलमान देश छोड़ कर उधर ही चले जाएं जहां उनके मूल आज़दा आए थे या फिर हिंदू धर्म स्वीकार कर लें बाद में हिन्दुओं ने भारी हाथ मुसलमानों को हिंदू बनाने के लिए शघटन और शधी जैसी थरिकें भी चलाएँ जो मुतअस्सिब हिन्दू ज़हनयत का मुंह बोलता प्रमाण थीं इसलिए हिन्दुओं के नॉर्वे व्यवहार को देखते हुए मुसलमानों को एक अलग राजनीतिक पार्टी मुस्लिम लीग बनाई।
आरिया समाज आंदोलन और बंगाली साहित्य: हिन्दू ना केवल मुसलमानों का शारीरिक अस्तित्व मटता देखना चाहते थे बल्कि उनकी आत्मा को फ़ना कर देना चाहते थे उद्देश्य के तहत उन्होंने इस्लामी सभ्यता और संस्कृति पर भी वार किया बंगाली साहित्य में इस्लामी संस्कृति पर कीचड़ उछाला गया और आरिया समाज जैसी आन्दोलन चलाएँ गईं जिनका उद्देश्य था उर्दू भाषा और लिपि को खत्म करके उसकी जगह हिन्दी चालू की इस मुस्लिम संस्कृति पर हमला भी मुस्लिम राजनीतिक समझ की जागरूकता और मुस्लिम लीग की स्थापना का सूत्रधार साबित हुआ।
गाय की बलि समस्या: हिन्दुओं ने मुसलमानों के धार्मिक समझमलात मैन भी खुली और अवैध घुसपैठ करते हुए गाय की बलि पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए जिससे हिंदू मुस्लिम दंगों होने शुरू हो गए सो ऐसे समझमलात से नबरदआज़मा के भी मुस्लिम लीग की स्थापना को जरूरी बताया गया
विभाजन बंगाल १९०५ मुस्लिम लीग की स्थापना का सबसे बड़ा कारण।
 
== पाकिस्तान के लिए संघर्ष ==
बेनामी उपयोगकर्ता