"लाहौर संकल्पना" के अवतरणों में अंतर

10,118 बैट्स् जोड़े गए ,  5 वर्ष पहले
(नया पृष्ठ: 250px|thumb|right|[[अखिल भारतीय मुस्लिम लीग की कार्य समिति की ल...)
 
अप्रैल सन् 1941 में [[चेन्नई|मद्रास]] में मुस्लिम लीग के सम्मेलन में ''' संकल्प लाहौर '''को पार्टी के [[संविधान]] में शामिल किया गया और इसी के आधार पर [[पाकिस्तान आंदोलन]] शुरू हुई। लेकिन फिर भी इन क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान नहीं की गई थी, जिनमें शामिल अलग मुस्लिम राज्यों की मांग किया जा रहा था।
 
== लाहौर संकल्प का संपादन ==
 
[[Image:Ispahani..jpg|left|thumb|[[हसन इस्फ़हानी]]]]
पहली बार पाकिस्तान की मांग के लिए क्षेत्रों की पहचान 7 अप्रैल सन् 1946 [[दिल्ली]] के तीन दिवसीय सम्मेलन में की गई जिसमें केंद्रीय और प्रांतीय विधानसभाओं के मुस्लिम लेगी सदस्यों ने भाग लिया था। इस सम्मेलन में [[ब्रिटेन]] से आने वाले [[कैबिनेट मिशन]] के प्रतिनिधिमंडल के सामने मुस्लिम लीग की मांग पेश करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया गया था जिसका मसौदा मुस्लिम लीग की कार्यकारिणी के दो सदस्यों [[चौधरी रिएक ाल्समाँ]] और [[हसन इस्फ़हानी]] ने तैयार किया था। इस करादाद में स्पष्ट रूप से पाकिस्तान में शामिल किए जाने वाले क्षेत्रों की पहचान की गई थी। पूर्वोत्तर में [[बंगाल]] और [[असम]] और उत्तर पश्चिम में [[पंजाब]], [[पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत | सीमा]], [[सिंध]] और [[बलूचिस्तान]]। आश्चर्य की बात है कि इस संकल्प में [[कश्मीर]] का कोई जिक्र नहीं था हालांकि उत्तर पश्चिम में मुस्लिम बहुल क्षेत्र था और [[पंजाब]] से जुड़ा हुआ था।
 
यह बात बेहद महत्वपूर्ण है कि [[दिल्ली]] कन्वेंशन इस संकल्प में दो राज्यों का उल्लेख बिल्कुल हटा दिया गया था जो संकल्प लाहौर में बहुत स्पष्ट रूप से था उसकी जगह पाकिस्तान की एकमात्र राज्य की मांग की गई थी।
 
== दस्तावेज के निर्माता ==
[[Image:Sikander1940.jpg|left|thumb|[[सर सिकंदर हयात खान]]]]
शायद बहुत कम लोगों को यह पता है कि संकल्प लाहौर का मूल मसौदा उस ज़माने के [[पंजाब]] के यूनीनसट मुख्यमंत्री [[सर सिकंदर हयात खान]] ने तैयार किया था।
[[यूनीनसट पार्टी]] उस ज़माने में मुस्लिम लीग में एकीकृत हो गई थी और सिर सिकंदर हयात खान [[पंजाब]] [[मुस्लिम लीग]] के अध्यक्ष थे।
 
सिर सिकंदर हयात खान ने संकल्प के मूल मसौदे में उपमहाद्वीप में एक केंद्रीय सरकार के आधार पर लगभग कंडरेशन प्रस्तावित थी लेकिन जब मसौदा मुस्लिम लीग सब्जेक्ट कमेटी में विचार किया गया तो कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने खुद इस मसौदे में एकमात्र केंद्र सरकार का उल्लेख मौलिक काट दिया।
 
सिर सिकंदर हयात खान इस बात पर सख्त नाराज थे और उन्होंने 11 मार्च सन् 1941 को पंजाब विधानसभा में साफ-साफ कहा था कि उनका पाकिस्तान का नजरिया जिन्ना साहब के सिद्धांत मुख्य रूप से अलग है। उनका कहना था कि वह [[भारत]] में एक ओर हिन्दउ राज और दूसरी ओर मुस्लिम राज के आधार पर वितरण के सख्त खिलाफ हैं और वह ऐसी बकौल उनके विनाशकारी वितरण का डटकर मुकाबला करेंगे। मगर ऐसा नहीं हुआ।
 
सिर सिकंदर हयात खान दूसरे वर्ष सन 1942 में 50 साल की उम्र में निधन हो गया यूं पंजाब में [[मुहम्मद अली जिन्ना]] तीव्र विरोध के उठते हुए हिसार से मुक्ति मिल गई।
 
[[Image:Hussein Shaheed Sehrwarday.JPG|left|thumb|[[हुसैन शहीद सोहरावर्दी]]]]
सन् 1946 के दिल्ली अधिवेशन में पाकिस्तान की मांग संकल्प [[हुसैन शहीद सोहरावर्दी]] ने पेश की और [[यूपी]] के मुस्लिम लेगी नेता [[चौधरी रिएक ाल्समाँ]] ने इसकी तायद की थी। संकल्प लाहौर पेश करने वाले [[कृपा हक | मौलवी कृपा हक]] इस सम्मेलन में शरीक नहीं हुए क्योंकि उन्हें सुन 1941 में [[मुस्लिम लीग]] सेखारज कर दिया गया था।
 
दिल्ली सम्मेलन में बंगाल के नेता [[अबू अलहाश्म]] ने इस संकल्प पर जोर विरोध किया और यह तर्क दिया है कि इस संकल्प लाहौर संकल्प से काफी अलग है जो [[मुस्लिम लीग]] के संविधान का हिस्सा है- उनका कहना था कि संकल्प लाहौर में स्पष्ट रूप से दो राज्यों के गठन की मांग की गई थी इसलिए दिल्ली कन्वेंशन को [[मुस्लिम लीग]] की इस बुनियादी संकल्प में संशोधन का कतई कोई विकल्प नहीं-
 
अबवालहाश्म के अनुसार कायदे आजम ने इसी सम्मेलन में और बाद में बम्बई में एक बैठक में यह समझाया था कि इस समय के बाद उपमहाद्वीप में दो अलग संविधान विधानसभाओं के गठन की बात हो रही है तो दिल्ली कन्वेंशन संकल्प में एक राज्य का उल्लेख किया गया है।
 
[[Image:Aga Khan III and Chaudhry Khaliquzzaman.jpg| right | thumb | [[चौधरी रिएक ाल्समाँ]] और [[आगा खान सोम]]]]
लेकिन जब पाकिस्तान की संविधान सभा संविधान सेट करेगी तो वह इस समस्या के अंतिम मध्यस्थ होगी और यह दो अलग राज्यों के गठन के फैसले का पूरा अधिकार होगा।
 
लेकिन [[पाकिस्तान]] की संविधान सभा ने न तो [[कायदे आजम]] जीवन में और न जब सन 1956 में देश का पहला संविधान पारित हो रहा था उपमहाद्वीप में मुसलमानों की दो स्वतंत्र और स्वायत्त राज्यों के स्थापना पर विचार किया।
 
25 साल की राजनीतिक उथल-पुथल और संघर्ष और सुन 1971 में [[बांग्लादेश]] युद्ध के विनाश के बाद लेकिन उपमहाद्वीप में मुसलमानों की दो अलग ममलकतें उभरीं जिनका मांग संकल्प लाहौर के मामले में आज भी सुरक्षित है।
== बाहरी लिंक ==
[Http://www.bbc.co.uk/urdu/pakistan/story/2005/03/050321_pak_resolution_fz.shtml उपमहाद्वीप के इतिहास का महत्वपूर्ण मील का पत्थर]
 
{{पाकिस्तान आंदोलन}}
{{भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन}}
{{पाकिस्तान के राष्ट्रीय प्रतीक}}
==इन्हें भी देखें==
 
164

सम्पादन