"जन्तर मन्तर (जयपुर)" के अवतरणों में अंतर

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;दिशा यंत्र
यह एक सरल यंत्र है। जंतर मंतर परिसर में बीचों बीच एक बड़े वर्गाकार समतल धरातल पर लाल पत्थर से विशाल वृत बना है और केंद्र से चारों दिशाओं में एक समकोण क्रॉस बना है। यह दिशा यंत्र है जिससे सामान्य तौर पर दिशाओं का ज्ञान होता है।
[[चित्र:Samrat Jantar.JPG|right|thumb|300px150px|सम्राट यन्त्र]]
;सम्राट यंत्र
जंतर मंतर में सबसे विशाल यंत्र सम्राट यंत्र है। अपनी भव्यता और विशालता के कारण ही इसे सम्राट यंत्र कहा गया। यंत्र की भव्यता का अंदाजा इसी से हो जाता है कि धरातल से इसके शीर्ष की ऊंचाई 90 फीट है। सम्राट यंत्र में शीर्ष पर एक छतरी भी बनी हुई है। यह यंत्र ग्रह नक्षत्रों की क्रांति, विषुवांश और समय ज्ञान के लिए स्थापित किया गया था।
;जयप्रकाश यंत्र ’क’ और जयप्रकाश यंत्र ’ख’
जय प्रकाश यंत्रों का आविष्कार स्वयं महाराजा जयसिंह ने किया। कटोरे के आकार के इन यंत्रों की बनावट बेजोड़ है। जंतर मंतर परिसर में ये यंत्र सम्राट यंत्र और दिशा यंत्र के बीच स्थित हैं। इनमें किनारे को क्षितिज मानकर आधे खगोल का खगोलीय परिदर्शन और प्रत्येक पदार्थ के ज्ञान के लिए किया गया था। साथ ही इन यंत्रों से सूर्य की किसी राशि में अवस्थिति का पता भी चलता है। ये दोनो यंत्र परस्पर पूरक हैं।
[[चित्र:NarivalayaYantraJaipur20080213-1.jpg|right|thumb|300px150px|नाडीवलय यन्त्र]]
;नाड़ीवलय यंत्र
यह यंत्र प्रवेशद्वार के दायें भाग में स्थित है। यह दो गोलाकार फलकों में बंटा हुआ है। इनके केंद्र बिंदु से चारों ओर दर्शाई विभिन्न रेखाओं से सूर्य की स्थिति और स्थानीय समय का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है।
;लघु सम्राट यंत्र
लघु सम्राट यंत्र घ्रुव दर्शक पट्टिका के पश्चिम में स्थित यंत्र है। इसे धूप घड़ी भी कहा जाता है। इस यंत्र से स्थानीय समय की सटीक गणना होती है। लाल पत्थर से निर्मित यह यंत्र सम्राट यंत्र का ही छोटा रूप है इसीलिये यह लघुसम्राट यंत्र के रूप में जाना जाता है।
[[चित्र:Jantarmantar02.jpg|right|thumb|300px150px|राशिवलय यन्त्र]]
;राशि वलय यंत्र
इनकी संख्या १२ है जो 12 राशियों को इंगित करते हैं। प्रत्येक राशि और उनमें ग्रह-नक्षत्रों की अवस्थिति को दर्शाते इन बारह यंत्रों की खास विशेषता इन सबकी बनावट है। देखने में ये सभी यंत्र एक जैसे हैं लेकिन आकाश में राशियों की स्थिति को इंगित करते इन यंत्रों की बनावट भिन्न भिन्न है।
;दिगंश यंत्र
इस यंत्र के द्वारा पिंडों के [[दिगंश]] का ज्ञान किया जाता था। दिगंश यंत्र निकास द्वार के पास स्थित है। यह यंत्र वृताकार प्राचीर में छोटे वृत्तों के रूप में निर्मित है।
[[चित्र:Yantramandir03.jpg|right|thumb|300px150px|राजयन्त्र]]
 
== आज भी मिलती है सटीक जानकारी ==