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|publisher = [[ब्रिटैनिका विश्वकोष]], Inc.
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== मिथकीय इतिहास ==
प्राचीन हिन्दू मिथकों के अनुसार भारत को एक सनातन राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यह मानव-सभ्यता का पहला राष्ट्र था। [[श्रीमद्भागवत]] के पञ्चम स्कन्ध में भारत राष्ट्र की स्थापना का वर्णन आता है। [[भारतीय दर्शन]] के अनुसार सृष्टि उत्पत्ति के पश्चात [[ब्रह्मा]] के मानस पुत्र स्वयंभू [[मनु]] ने व्यवस्था संभाली । इनके दो पुत्र, [[प्रियव्रत]] और [[उत्तानपाद]] थे। [[उत्तानपाद]] भक्त [[महाराजा ध्रुव|ध्रुव]] के पिता थे। इन्हीं प्रियव्रत के दस पुत्र थे। तीन पुत्र बाल्यकाल से ही विरक्त थे। इस कारण प्रियव्रत ने [[पृथ्वी]] को सात भागों में विभक्त कर एक-एक भाग प्रत्येक पुत्र को सौंप दिया। इन्हीं में से एक थे ''आग्नीध्र'' जिन्हें [[जम्बूद्वीप]] का शासन कार्य सौंपा गया। वृद्धावस्था में [[आग्नीध्र]] ने अपने नौ पुत्रों को [[जम्बूद्वीप]] के विभिन्न नौ स्थानों का शासन दायित्व सौंपा। इन नौ पुत्रों में सबसे बड़े थे ''नाभि'' जिन्हें [[हिमवर्ष]] का भू-भाग मिला। इन्होंने हिमवर्ष को स्वयं के नाम अजनाभ से जोड़ कर ''[[अजनाभवर्ष]]'' प्रचारित किया। यह हिमवर्ष या अजनाभवर्ष ही प्राचीन भारत देश था। [[राजा नाभि]] के पुत्र थे [[ऋषभदेव|ऋषभ]]। ऋषभदेव के सौ पुत्रों में भरत ज्येष्ठ एवं सबसे गुणवान थे। [[ऋषभदेव]] ने [[वानप्रस्थ आश्रम|वानप्रस्थ]] लेने पर उन्हें राजपाट सौंप दिया। पहले भारतवर्ष का नाम ॠषभदेव के पिता नाभिराज के नाम पर ''[[अजनाभवर्ष]]'' प्रसिद्ध था। भरत के नाम से ही लोग अजनाभखण्ड को [[भारतवर्ष]] कहने लगे।
 
== राष्ट्रीय प्रतीक ==
{{main|भारत का इतिहास}}
[[चित्र:Sanchi2.jpg|thumb|तीसरी शताब्दी में सम्राट [[अशोक]] द्वारा बनाया गया [[मध्य प्रदेश]] में [[साँची का स्तूप]]]]
 
== मिथकीय=धार्मिक इतिहास ===
प्राचीन हिन्दू मिथकोंमान्यताओं के अनुसार भारत को एक सनातन राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यह मानव-सभ्यता का पहला राष्ट्र था। [[श्रीमद्भागवत]] के पञ्चम स्कन्ध में भारत राष्ट्र की स्थापना का वर्णन आता है। [[भारतीय दर्शन]] के अनुसार सृष्टि उत्पत्ति के पश्चात [[ब्रह्मा]] के मानस पुत्र स्वयंभू [[मनु]] ने व्यवस्था संभाली ।सम्भाली। इनके दो पुत्र, [[प्रियव्रत]] और [[उत्तानपाद]] थे। [[उत्तानपाद]] भक्त [[महाराजा ध्रुव|ध्रुव]] के पिता थे। इन्हीं प्रियव्रत के दस पुत्र थे। तीन पुत्र बाल्यकाल से ही विरक्त थे। इस कारण प्रियव्रत ने [[पृथ्वी]] को सात भागों में विभक्त कर एक-एक भाग प्रत्येक पुत्र को सौंप दिया। इन्हीं में से एक थे ''आग्नीध्र'' जिन्हें [[जम्बूद्वीप]] का शासन कार्य सौंपा गया। वृद्धावस्था में [[आग्नीध्र]] ने अपने नौ पुत्रों को [[जम्बूद्वीप]] के विभिन्न नौ स्थानों का शासन दायित्व सौंपा। इन नौ पुत्रों में सबसे बड़े थे ''नाभि'' जिन्हें [[हिमवर्ष]] का भू-भाग मिला। इन्होंने हिमवर्ष को स्वयं के नाम अजनाभ से जोड़ कर ''[[अजनाभवर्ष]]'' प्रचारित किया। यह हिमवर्ष या अजनाभवर्ष ही प्राचीन भारत देश था। [[राजा नाभि]] के पुत्र थे [[ऋषभदेव|ऋषभ]]। ऋषभदेव के सौ पुत्रों में भरत ज्येष्ठ एवं सबसे गुणवान थे। [[ऋषभदेव]] ने [[वानप्रस्थ आश्रम|वानप्रस्थ]] लेने पर उन्हें राजपाट सौंप दिया। पहले भारतवर्ष का नाम ॠषभदेव के पिता नाभिराज के नाम पर ''[[अजनाभवर्ष]]'' प्रसिद्ध था। भरत के नाम से ही लोग अजनाभखण्ड को [[भारतवर्ष]] कहने लगे।
 
[[पाषाण युग]] [[भीमबेटका]] [[मध्य प्रदेश]] की गुफाएँ भारत में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण हैं। प्रथम स्थाई बस्तियों ने ९००० वर्ष पूर्व स्वरुप लिया। यही आगे चल कर [[सिन्धु घाटी सभ्यता]] में विकसित हुई, जो [[२६वीं शताब्दी ईसा पूर्व|२६०० ईसा पूर्व]] और [[२०वीं शताब्दी ईसा पूर्व|१९०० ईसा पूर्व]] के मध्य अपने चरम पर थी।<ref>{{cite web |title = Introduction to the Ancient Indus Valley |url=http://www.harappa.com/indus/indus1.html
|accessdate = 2007-06-18 |year= 1996 |publisher = Harappa}}</ref>