"ज़मींदारी प्रथा" के अवतरणों में अंतर

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अत: सन् 1946 ई0 में चुनाव में सफलता के फलस्वरूप जब हर प्रांत में कांग्रेस मंत्रिमंडल बने तो चुनाव प्रतिज्ञा के अनुसार जमींदारी प्रथा को समाप्त करने के लिये विधेयक प्रस्तुत किए गए। ये विधेयक सन् 1950 ई0 से 1955 ई0 तक अधिनियम बनकर चालू हो गए जिनके परिणामस्वरूप जमींदारी प्रथा का भारत में उन्मूलन हो गया और कृषकों एवं राज्य के बीच पुन: सीधा संबंध स्थापित हो गया। भूमि के स्वत्वाधिकार अब कृषकों को वापस मिल गए जिनका उपयोग वे अनादि परंपरागत काल से करते चले आए थे।
 
इस प्रकार जिस जमींदारी प्रथा का उदय हमारे देश में अंग्रेजों के आगमन से हुआ था उसका अंत भी उनके शासन के समाप्त होते ही हो गया। इस प्रथा की समाप्ति पर किसी ने तनिक भी शोक प्रकट नहीं किया, क्योंकि इसका विनाश होते ही पुराने सिद्धांत की, जिसके अनुसार भूमि का स्वामी कृषक होता था, पुनरावृति हुई। जो दिनांक 02/10/1951 को जमीदारी प्रथा की समाप्ति हुई थी मध्‍य प्रदेश में भी ग्‍वालियर रियासत में जमीदारी की व्‍यवस्‍था थी जो आगर सुसनेर आदि मालवा के अधिकांश हिस्‍से ग्‍वालियर रियासत के अधिन थें
 
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