मुख्य मेनू खोलें

बदलाव

35 बैट्स् जोड़े गए ,  3 वर्ष पहले
भारत में व्याप्ति की स्थापनाएँ (आगमन) तीन या तीनों मे से किसी एक प्रकार के प्रत्यक्ष ज्ञान के आधार पर होती थीं। वे ये हैं :
 
(1) '''[[केवलान्वयी|केवलान्वय]]''', जब लिंग और साध्य का साहचर्य मात्र अनुभव में आता है, जब उनका सह-अभाव न देखा जा सकता हो।
 
(2) '''केवल व्यतिरेक''' जब साध्य और लिंग और लिंग का सह-अभाव ही अनुभव में आता है, साहचर्य नहीं।