"रूपक": अवतरणों में अंतर

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आज फीचर लेखन तथा उसके प्रस्तुतिकरण का आधुनिक [[पत्रकारिता]] में अत्यधिक महत्व हो गया है। समाचार अगर पत्रकारिता की रीढ़ है तो फीचर पत्रकरिता का सौन्दर्य बढ़ाने वाली शक्ति। पत्रकारिता में समाचार जहाँ तात्कालिक घटनाओं का तत्थ्यपूर्ण अभिलेख होता है तो रूपक यानी फीचर समाचार के तत्काल स्वरूप से अलग उसका विस्तार, उसका सचित्र प्रस्तुतिकरण या उससे जुड़े सम्पूर्ण घटनाक्रम का विवरण प्रस्तुत करता है। आधुनिक पत्रकारिता में अब स्थानाभाव के कारण समाचार लेखन में शब्दों की सीमा तय कर दी गई है और पत्रकार को उसी शब्द सीमा में सब कुछ कहना होता है। ऐसे में फीचर, पत्रकार के लिए एक मददगार के तौर पर काम करता है। फीचर में ग्राफिक्स, चित्रों, रेखाचित्रों और संक्षिप्त प्रस्तुतिकरण के जरिए बहुत छोटे स्थान में बहुत कुछ कहा, लिखा या प्रस्तुत किया जा सकता है। रूपक का विकास विवरणात्मक रचनाओं से हुआ है लेकिन शब्दों और स्थान की सीमा के चलते अब फीचर भी संक्षिप्त होने लगे हैं। हालाँकि संक्षिप्त होने के बावजूद फीचर का महत्व कम नहीं हुआ है बल्कि और अधिक बढ़ गया है।
 
फीचर में समाचार के विस्तार को ही एक विशेष तकनीक के साथ प्रस्तुत किया जाता है। इसके लिए फीचर लेखक को यह पता करना होता है कि समाचार का मुख्य विषय या मुख्य पात्र कौन है? समाचार के मुख्य विषय के साथ जुड़े प्रमुख तत्व क्या हैं? ले खक को इस सबकों प्रस्तुत करते समय उसमें व्यक्तिगत स्पर्श भी देना होता हैहै। मानवीय भावनाओं के स्पर्श के साथ-साथ मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत फीचर अधिक लोकप्रिय होते है क्योंकि उनसे विषय के सम्पूर्ण तत्थ्यों की जानकारी के साथ-साथ पाठक, श्रोता या दर्शक का मनोरंजन भीहोता है।
 
समाचार तथ्यों का विवरण तथा विचार देकर खत्म हो जाता है जबकि फीचर में घटना अथवा विषय के परिवेश, विविध पक्षों तथा उसके प्रभावों का वर्णन होता है। समाचार में लिखने वाले के विचार अथवा उसके व्यक्तित्व की झलक नहीं होती जबकि फीचर में लेखक की विचारधारा, उसकी कल्पनाशीलता के साथ-साथ उसके व्यक्तित्व की भी झलक मिलती है। फीचर में कथा तत्व की प्रधानता रहती है यानी उसके लेखन या प्रस्तुति में सरलता और प्रवाह दोनों ही होते हैं। लेकिन फीचर महज कथा नहीं होता। फीचर कल्पनाजगत की बातों में खो जाने के बजाय विषय की गहराई में जाकर पाठकों की जिज्ञासा को शांत करने का काम करता है।
*(१) विषय का गम्भीरता से अध्ययन करना चाहिए।
 
*(२) इस बात का प्रयास करना चाहिए कि फीचर सामयिक होहो।
 
*(३) उसमें सूक्ति, मुहावरों, उदाहरणों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
 
==फीचर की रचना और लेखन==
फीचर, पत्रकारिता की एक ऐसी विधा है जिसमें लेखन को नियमों की किसी खास सीमा में नहीं बांधा जा सकता। विकसित देशों में पत्रकारिता की एक विधा के रूप में फीचर लेखन बहुत लोकप्रिय है। चूंकि भारत में पत्रकारिता का जन्म और विकास राजनीति के साथ हुआ है इसलिए यहाँ फीचर की विकास यात्रा अपेक्षाकृत देर से शुरू हुई। यहाँ प्रारम्भिक पत्रकारिता में कलम का उपयोग तलवार के रूप में किया गया। आजादी के बाद के वर्षो में और विशेष रूप से आपातकाल के बाद के वर्षो में अखबारों ने राजनीति से इतर जीवन के वृहत्तर आयामों कीखोज करने और जीवन को उसकी समग्रता में देखने समझने का काम तेज कर दिया था। इसी के चलते हमारे देश में फीचर लेखन की एक विशिष्ट शैली विकसित हुईहुई। प्रिंटिंग टैक्नोलॉजी में आए क्रान्तिकारी परिवर्तनों ने फीचर लेखन की उपयोगिता, जरूरत और महत्व तीनों को द्विगुणित कर दिया है।
 
फीचर रचना का मुख्य नियम यह है कि फीचर आकर्षक, तत्थ्यात्मकऔर मनोरंजक होना चाहिए। वर्तमान में फीचर के लिए किसी खास प्रकार का ले आऊट, साज सज्जा, आकार-प्रकार या शब्द सीमा का बंधन नहीं रह गया है। आज कम से कम शब्दों में फीचर रचना को अधिक महत्वपूर्ण माना जाने लगा है। इसी तरह अब एक विषय पर एक बड़ी रचना के बजाय एक साथ छोटी-छोटी कई सूचनाओं-सामग्रियों को प्रस्तुत करके भी फीचर लिखे जाने लगे हैं।