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गठबंधन के विभिन्न पक्षों में आपसी लडाई में लिप्तता के चलते शासन में असमर्थ जनता सरकार के गृह मंत्री [[चौधरी चरण सिंह]] कई आरोपों में इंदिरा गाँधी और संजय गाँधी को गिरफ्तार करने के आदेश दिए, जिनमे से कोई एक भी भारतीय अदालत में साबित करना आसन नहीं था। इस गिरफ्तारी का मतलब था इंदिरा स्वतः ही संसद से निष्कासित हो गई। परन्तु यह रणनीति उल्टे अपदापूर्ण बन गई। उनकी गिरफ्तारी और लंबे समय तक चल रहे मुकदमे से उन्हें बहुत से वैसे लोगों से सहानुभूति मिली जो सिर्फ दो वर्ष पहले उन्हें तानाशाह समझ डर गये थे।
 
जनता गठबंधन सिर्फ़ श्रीमती गांधी (या "वह औरत" जैसा कि कुछ लोगोने उन्हें कहा) की नफरत से एकजुट हुआ था। छोटे छोटे साधारण मुद्दों पर आपसी कलहों में सरकार फंसकर रह गयी थी और गांधी इस स्थिति का उपयोग अपने पक्ष में करने में सक्षम थीं। उन्होंने फिर से, आपातकाल के दौरान हुई "गलतियों" के लिए कौशलपूर्ण ढंग से क्षमाप्रार्थी होकर भाषण देना प्रारम्भ कर दिया.दिया। जून 1979 में देसाई ने इस्तीफा दिया और श्रीमती गांधी द्वारा वादा किये जाने पर कि कांग्रेस बाहर से उनके सरकार का समर्थन करेगी, रेड्डी के द्वारा चरण सिंह प्रधान मंत्री नियुक्त किए गये।
 
एक छोटे अंतराल के बाद, उन्होंने अपना प्रारंभिक समर्थन वापस ले लिया और राष्ट्रपति रेड्डीने 1979 की सर्दियों में संसद को भंग कर दिया.दिया। अगले जनवरी में आयोजित चुनावों में कांग्रेस पुनः सत्ता में वापस आ गया था
भूस्खलन होने जैसे बहुमत के साथ / महाभीषण बहुमत के साथ
 
=== ओपरेशन ब्लू स्टार और राजनैतिक हत्या ===
 
गांधी के बाद के वर्ष [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] समस्याओं से जर्जर थे। सितम्बर 1981 में [[जरनैल सिंह भिंडरावाले]] का [[अलगाववादी]] सिख आतंकवादी समूह सिख धर्म के पवित्रतम तीर्थ, [[हरिमन्दिर साहिब]] परिसर के भीतर तैनात हो गया। स्वर्ण मंदिर परिसर में हजारों नागरिकों की उपस्थिति के बावजूद गांधी ने आतंकवादियों का सफया करने के एक प्रयास में सेना को धर्मस्थल में प्रवेश करने का आदेश दिया.दिया। सैन्य और नागरिक हताहतों की संख्या के हिसाब में भिन्नता है। सरकारी अनुमान है चार अधिकारियों सहित उनासी सैनिक और 492 आतंकवादी; अन्य हिसाब के अनुसार, संभवत 500 या अधिक सैनिक एवं अनेक तीर्थयात्रियों सहित 3000 अन्य लोग गोलीबारी में फंसे.<ref>रामचंद्र गुहा''गाँधी के बाद भारत ''पन्ना 563</ref> जबकि सटीक नागरिक हताहतों की संख्या से संबंधित आंकडे विवादित रहे हैं, इस हमले के लिए समय एवं तरीके का निर्वाचन भी विवादास्पद हैं।
इन्दिरा गांधी के बहुसंख्यक अंगरक्षकों में से दो थे [[सतवंत सिंह]] और [[बेअन्त सिंह]], दोनों सिख.[[३१ अक्टूबर]] [[1984]] को वे अपनी सेवा हथियारों के द्वारा 1, सफदरजंग रोड, नई दिल्ली में स्थित प्रधानमंत्री निवास के बगीचे में इंदिरा गांधी की राजनैतिक हत्या की.की। <ref name="ibn">http://khabar.ibnlive.in.com/news/115182/12/4 जब हिल उठा देशः इंदिरा गांधी की हत्या</ref> वो [[ग्रेट ब्रिटेन|ब्रिटिश]] अभिनेता [[पीटर उस्तीनोव]] को आयरिश टेलीविजन के लिए एक वृत्तचित्र फिल्माने के दौरान साक्षात्कार देने के लिए सतवंत और बेअन्त द्वारा प्रहरारत एक छोटा गेट पार करते हुए आगे बढ़ी थीं। इस घटना के तत्काल बाद, उपलब्ध सूचना के अनुसार, बेअंत सिंह ने अपने बगलवाले शस्त्र का उपयोग कर उनपर तीन बार गोली चलाई और सतवंत सिंह एक स्टेन कारबाईन का उपयोग कर उनपर बाईस चक्कर गोली दागे. उनके अन्य अंगरक्षकों द्वारा बेअंत सिंह को गोली मार दी गई और सतवंत सिंह को गोली मारकर [[गिरफ्तार]] कर लिया गया।
 
गांधी को उनके सरकारी कार में अस्पताल पहुंचाते पहुँचाते रास्ते में ही दम तोड़ दीं थी, लेकिन घंटों तक उनकी मृत्यु घोषित नहीं की गई। उन्हें [[अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान]] में लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उनका ऑपरेशन किया। उस वक्त के सरकारी हिसाब 29 प्रवेश और निकास घावों को दर्शाती है, तथा कुछ बयाने 31 बुलेटों के उनके शरीर से निकाला जाना बताती है। उनका अंतिम संस्कार [[3 नवंबर]] को [[राज घाट]] के समीप हुआ और यह जगह [[शक्ति स्थल]] के रूप में जानी गई। उनके मौत के बाद, [[नई दिल्ली]] के साथ साथ भारत के अनेकों अन्य शहरों, जिनमे कानपुर, आसनसोल और इंदौर शामिल हैं, में सांप्रदायिक अशांति घिर गई और हजारों सिखों के मौत दर्ज किये गये। गांधी के मित्र और जीवनीकार [[पुपुल जयकर]], ऑपरेशन ब्लू स्टार लागू करने से क्या घटित हो सकती है इस सबध में इंदिरा के तनाव एवं पूर्व-धारणा पर आगे प्रकाश डालीं हैं।
* उनकी हत्या का जिक्र[[टॉम क्लेन्सि]] द्वारा अपने उपन्यास [[एक्जीक्यूटिव ऑर्डर्स]] में किया गया है।
* यद्यपि कहीं भी नाम का उल्लेख नहीं मिलता है, [[रोहिंतों मिस्त्री]] के ''[[ऐ फाईन बैलेंस]]'' में इंदिरा गांधी ही स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री है।
* [[सलमान रुशदी]] के उपन्यास ''[[मिडनाइट्स चिल्ड्रन]]'' में इंदिरा, जिन्हें सारे उपन्यास में "दा विडो" बुलाया जाता है, स्वयं जिम्मेदार है अपने अविस्मरनीय चरित्र के पतन के लिए.लिए। इंदिरा गाँधी का यह चित्रण, इसमे उनके एवं उनकी नीतिओं, दोनों के रूखे प्रदर्शन से कुछ खेमों में विवादित है।
* [[शशि थरूर]] की ''[[दा ग्रेट इंडियन नोवेल]]'' में प्रिय [[दुर्योधन]] का चरित्र साफ़ साफ़ इंदिरा गाँधी को संदर्भित करता है।
* "[[आंधी]]", [[गुलज़ार]] द्वारा निर्देशित एक हिन्दी चलचित्र (फीचर फ़िल्म) है, जो आंशिक रूप से इंदिरा की जिंदगी के कुछ घटनाओं, विशेष रूप से उनकी ([[सुचित्रा सेन]] द्वारा फिल्माया गया) उनके पति के साथ कठिन सम्बन्ध ([[संजीव कुमार]] द्वारा फिल्माया गया), का काल्पनिक अनुकरण है।