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1939 मे उन्होंने [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] के दौरान, अंग्रेज सरकार के खिलाफ लोक आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने सरकार को किराया और राजस्व रोकने के अभियान चलाए। [[टाटा स्टील कंपनी]] में हड़ताल करा के यह प्रयास किया कि अंग्रेज़ों को इस्पात न पहुंचे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 9 महीने की कैद की सज़ा सुनाई गई। जेल से छूटने के बाद उन्होने गांधी और सुभाष चंद्र बोस के बीच सुलह का प्रयास किया। उन्हे बंदी बना कर मुंबई की आर्थर जेल और दिल्ली की कैंप जेल मे रखा गया। 1942 भारत छोडो आंदोलन के दौरान वे आर्थर जेल से फरार हो गए।
: ''मुझे अपने लिए चिंता नहीं है, किंतु देश के लिए मुझे चिंता है।'' -- बिहार विभूति डॉ॰ अनुग्रह नारायण सिन्हा
उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हथियारों के उपयोग को सही समझा। उन्होंने [[नेपाल]] जा कर [[आज़ाद दस्ते]] का गठन किया और उसे प्रशिक्षण दिया। उन्हें एक बार फिर [[पंजाब]] में चलती ट्रेन में सितंबर 1943 मे गिरफ्तार कर लिया गया। 16 महीने बाद जनवरी 1945 में उन्हें आगरा जेल मे स्थांतरित कर दिया गया। इसके उपरांत गांधी जी ने यह साफ कर दिया था कि [[डॉ॰ लोहिया]] और जेपी की रिहाई के बिना अंग्रेज सरकार से कोई समझौता नामुमकिन है। दोनो को अप्रेल 1946 को आजाद कर दिया गया।
[[चित्र:J P Narayan.JPG|right|thumb|300px|१९५८ में इजराइल के प्रधानमन्त्री डेविड बेन गुरिओन के साथ [[तेल अवीब]] में जयप्रकाश जी]]
1948 मे उन्होंने कांग्रेस के समाजवादी दल का नेतृत्व किया और बाद में गांधीवादी दल के साथ मिल कर [[समाजवादी सोशलिस्ट पार्टी]] की स्थापना की। [[19 अप्रेल]], [[1954]] में [[गया]], [[बिहार]] मे उन्होंने [[विनोबा भावे]] के [[सर्वोदय आंदोलन]] के लिए जीवन समर्पित करने की घोषणा की। [[1957]] में उन्होंने लोकनीति के पक्ष मे राजनीति छोड़ने का निर्णय लिया।
वे इंदिरा गांधी की प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध थे। गिरते स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने बिहार में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया। उनके नेतृत्व में पीपुल्स फ्रंट ने [[गुजरात]] राज्य का चुनाव जीता। [[1975]] में इंदिरा गांधी ने [[आपातकाल (भारत)|आपात्काल]] की घोषणा की जिसके अंतर्गत जेपी सहित ६०० से भी अधिक विरोधी नेताओं को बंदी बनाया गया और प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई। जेल मे जेपी की तबीयत और भी खराब हुई। 7 महीने बाद उनको मुक्त कर दिया गया। [[1977]] जेपी के प्रयासों से एकजुट विरोध पक्ष ने इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया।
 
जयप्रकाश नारायण का निधन उनके निवास स्थान पटना में 8 अक्टूबर 1979 को हृदय की बीमारी और [[मधुमेह]] के कारण हुआ। उनके सम्मान में तत्कालीन प्रधानमंत्री [[चौधरी चरण सिंह]] ने ७ दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी, उनके सम्मान में कई हजार लोग उनकी शोक यात्रा में शामिल हुए।
 
== सम्पूर्ण क्रान्ति का आह्वान ==