"बारूद" के अवतरणों में अंतर

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स्टैंपिंग मशीन के उपयोग में, जैसा ऊपर कहा गया है, खतरे का भय था। इसके स्थान में चक्र या ह्वील मिल (Wheel Mill) का प्रयोग शरू हुआ। आजकल भी चक्र या ह्वील मिल का उन्नत रूप ही प्रयुक्त होता है। इसमें एक क्षैतिज ईषा (shaft) रहती है, जो ऊर्ध्वाधर स्पिंडल (spindle) के घूमने से घूमती है। स्पिंडल में लोहे के दो भारी चक्र जुड़े रहते हैं, जिनका भार 10 से 12 टन तक और व्यास छह फुट होता है। एक बार में लगभग 300 पाउंड द्रव्य पीसा जाता है। पानी डालकर उसे गीला रखते हैं। पिसाई चार से लेकर पाँच घंटे में संपन्न होती है। फिर वह दबाया जाता है। प्रति वर्ग इंच पर 3,000 से 4,000 पाउंड दबाव रहता है। ऐसे उत्पाद का घनत्व 1.74 से 1.80 तक होता है। इसे फिर तोड़कर विभिन्न विस्तार के दाने प्राप्त करते हैं। इस विधि में समय कुछ अधिक लगता था। अत: अब इसमें कुछ और सुधार किया गया है। दो लोहे के कक्ष, ड्रम के आकार के रहते हैं। एक में शोरा गंधक और दूसरे में कोयला गंधक काँसे की गेंदों के द्वारा पीसा जाता है। चार घंटे में विभिन्न अवयव पूर्ण रूप से चूर्ण हो जाते हैं। दोनों कक्षों से चूर्ण को निकालकर, तीसरे ताँबे के ड्रम में रखकर, काष्ठ की गेंदों से दो घंटे तक पीसते हैं, जिसमें एकसम चूर्ण बन जाता है। इस विधि को बेलननाल (rolling barrel) विधि कहते हैं।
 
== इन्हें भी देखें ==
* [[अग्निशस्त्र]]
* [[मोही का युद्ध]]
 
== बाहरी कड़ियाँ ==