"काव्यमीमांसा": अवतरणों में अंतर

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[[चित्र:Bhagavata Purana, translated by E. Burnouf Wellcome L0020721.jpg|अंगूठाकार|राजशेखर संस्क्रत कवि थे। ]]
'''काव्यमीमांसा''' कविराज [[राजशेखर]] (८८०-९२० ई.) कृत [[काव्यशास्त्र]] संबंधी मानक ग्रंथ है। 'काव्यमीमांसा' का अभी तक केवल प्रथम अधिकरण 'कविरहस्य' ही प्राप्त है और इसके भी मात्र १८ अध्याय ही मिलते हैं। १९वाँ अध्याय 'भुवनकोश' अप्राप्त है। किंतु 'कविरहस्य' अधिकरण के प्रथम तीन अध्यायों से पता चलता है कि कृतिकार ने काव्यमीमांसा में १९ अधिकरणों का समायोजन किया था और प्रत्येक अधिकरण में विषयानुरूप कई-कई अध्याय थे।
 
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