"द्रव्यगुण विज्ञान" के अवतरणों में अंतर

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'द्रव्यगुण' दो शब्दों से मिलकर बना है - 'द्रव्य' (matter) तथा 'गुण' (properties)। द्रव्य के अन्तर्गत जीवित और निर्जीव दोनो वस्तुएँ आ जाती हैं।
 
[[चरक]] का कहना है कि कुछ भी ऐसा नहीं है जो 'औषधि' न हो। आयुर्वेद का मत है कि किसी औषधि का प्रभाव उसके किसी एक घटक के अकेले के प्रभाव से प्रायः भिन्न होता है। औषधियोंआयुर्वेद केमें कार्यवनस्पतियों औरके प्रभावगुणागुणों को जाननेपाँच केभागों लियेमें उनकेभाँटा गया है- रस (taste), गुण (properties), वीर्य (biological properties) और, विपाक (attributes of drug assimilation) और शक्ति (Energy)। औषधियों के कार्य और प्रभाव को जानने के लिये उनके रस, गुण, वीर्य, विपाक, और शक्ति का ज्ञान अति आवश्यक है।
 
: ''वैद्येन पूर्वं ज्ञातव्यो द्रव्याणामगुणाः गुणाः।