"द्रव्यगुण विज्ञान" के अवतरणों में अंतर

सम्पादन सारांश रहित
: ''वैद्येन पूर्वं ज्ञातव्यो द्रव्याणामगुणाः गुणाः।
: ''यदायत्तं हि भैषज्यं यज्ज्ञाने जात क्रिया क्रमः॥
 
ये भी कहा गया है कि-
 
: ''निघण्टुना विना वैद्यो विद्वान् व्याकरणं विना।
: ''अनभ्यासेन धानुष्कस्त्रयो हास्यस्य भाजनम्॥ (राजनिघण्टु १/९)
 
आयुर्वेद में 600 से भी अधिक औषधीय पादपों को औषध के रूप में उपयोग में लाया जाता है। इन्हें अकेले या दूसरों साथ मिलाकर रोगों से मुक्ति पाया जाता है। औषधीय पादप अलग-अलग तरह के कृषि-जलवायीय क्षेत्रों (जंगल, अनूप, साधारण देश) में पैदा होते हैं। वर्तमान समय में औषधीय पादपों को 'प्राकृतिक औषध' के रूप में प्रयोग करने का चलन बढ़ा है। इस कारण इस विषय का महत्व और भी बढ़ गया है।