"मंदिर श्री ठाकुर सत्य नारायण जी" के अवतरणों में अंतर

{{उल्लेखनीयता}} जोड़े और {{स्रोतहीन}} जोड़े (TW)
छो
({{उल्लेखनीयता}} जोड़े और {{स्रोतहीन}} जोड़े (TW))
{{उल्लेखनीयता|date=जुलाई 2016}}
{{स्रोतहीन|date=जुलाई 2016}}
नाभा शहर पंजाब का बहुत ही पुराना और धार्मिक महत्व रखने वाला शहर है. नाभा रयासत बहुत प्रसिद्ध रयासत रही है. पुराने नाभा शहर को पुरानी नाभि नाम से जाना जाता है.नाभा बस स्टैंड से एक किलोमीटर की दूरी पर मंदिर श्री ठाकुर सत्य नारायण जी स्तिथ है.इस मंदिर का इतिहास लगभग 218 साल पुराना है. सबसे पहले इस मंदिर में ठाकुर जी की छोटी मूर्तियां थी.मंदिर कमेटी के सबसे पुराने सरपरस्त दौलत राम सराफ,हरी राम,द्वारका दास,कृष्ण चाँद जिंदिया,वेद प्रकाश,रोशन लाल बंसल.बाबू राम,थे. यही पहले मंदिर सेवा देखते थे.मंदिर के सबसे पहले पंडित बीरज लाल जी के पिता जी थे.आप ने 20 साल बहुत ही श्रद्धा से सेवा की.18-3-1980 में राजस्थान के शहर जयपुर से लाकर मंदिर में राधा कृष्ण और माँ नैना देवी जी की मूर्ती स्थापित हुई.लंगर और विशाल समागम का आयोजन हुआ,पूरी निष्ठां से मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई.पंडित बीरज लाल जी के पिता के बाद गढ़वाल चमेली के पंडित द्वारका दास जी ने मंदिर में सेवा शुरू की.उनके बाद पंडित बची राम मंदिर में सेवा हेतु आये.आप गढ़वाल के निवासी हैं.आप के गुरु भागवत परसाद ज्योत्षी जी हैं.आप करम कांडी ब्राह्मण हैं और बहुत ही निष्ठां भाव से मंदिर सेवा और पूजा अर्चना करते हैं.पंडित जी के मत अनुसार परमात्मा सर्व शक्तिमान है.और जीव को उस के कर्मों के अनुसार ही फल की प्राप्ति होती है.व्यक्ति को अछे करम करने की कोशिश करनी चाहिए.अगस्त 1985 में मंदिर में श्री सत्य नारायण जी की मूर्ती स्थापित की गई.हरिद्वार के संत स्वामी अविदेसानन्द जी ने उस समय मंदिर में धार्मिक पर्वचन किये.उस समय लंगर और विशाल शोभा यात्रा निकाली गई.आज मंदिर कमेटी में प्रधान अशोक कुमार जिंदल,अश्वनी कुमार, गगन गोयल ( कैशियर ),गणपत राय,केवल कृष्ण जिंदल,ओम प्रकाश ठेकेदार,नरेश गुप्ता,मोहन लाल शर्मा,रमेश जिंन्दिया ,जय प्रकाश बंसल,अपने बजुर्गों की जगह आज इस मंदिर में सेवा और देख रेख कर रहे हैं.जनम अष्टमी और जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव विशेष रूप से इस मंदिर में मनाये जाते हैं.दिवाली के अगले दिन अन्नकूट का भंडारा होता है.और कढ़ी चावल का लंगर किया जाता है.रामनवमी के दिन मंदिर में झंडे चढ़ाने की रसम होती है.कार्तिक के महीने में पूरे एक महीने भगत तुलसी विवाह और ठाकुर जी की परिक्रमा हेतु विशेष रूप से आते हैं. 41 दिन सच्चे मन और निष्ठां भाव से ठाकुर जी के दर्शन करने से मन की सब मुरादें पूरी होती हैं.और हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है.मंदिर प्रधान अशोक जी बहुत सज्जन और मिलनसार व्यक्ति हैं.मंदिर में पब्लिक न्यूज़ टाइम्स की टीम को समस्त मंदिर कमेटी ने विशेष योगदान दिया.प्रधान जी के अनुसार देश के पतन का कारन नशा और बेरोज़गारी है. नौजवानो को मन लगा कर पढ़ना चाहिए और मन लगा कर काम करना चाहिए. नशे जैसी लानत से सदा ही बचना चाहिए.