"सायण" के अवतरणों में अंतर

3 बैट्स् जोड़े गए ,  4 वर्ष पहले
टैग: मोबाइल एप सम्पादन
टैग: मोबाइल एप सम्पादन
:'''आख्यया माधवीयेयं धातुवृत्तिर्विरच्यते॥'''
 
वेदभाष्यों के एक कर्तृत्व होने में कतिपय आलोचक संदेह करते हैं। संवत् 1443 वि. (सन् 1386 ई.) के [[मैसूर]] [[शिलालेख]] से पता चलता है कि वैदिक मार्ग प्रतिष्ठापक महाराजाधिराज हरिहर ने विद्याचरणविद्यारण्य श्रीपाद स्वामी के समक्ष चतुर्वेद-भाष्य-प्रवर्तक नारायण वायपेययाजी, नरहरि सोमयाजी तथा पंढरि दीक्षित नामक तीन ब्राह्मणों को अग्रहार देकर सम्मानित किया। इस शिलालेख का समय तथा विषय दोनों महत्वपूर्ण हैं। इसमें उपलब्ध "चतुर्वेद-भाष्य-प्रवर्तक" शब्द इस तथ्य का द्योतक है कि इन तीन ब्राह्मणों ने वेदभाष्यों के निर्माण में विशेष कार्य किया था। प्रतीत होता है, इन पंडितों ने सायणसायणको कोवेदभाष्योंके वेदभाष्यों के प्रणयन मेंप्रणयनमें साहाय्य दिया था और इसीलिए विद्याचरणविद्यारण्य स्वामी (अर्थात् सायण के अग्रज माधवाचार्य) के समक्ष उनका सत्कार करना उक्त अनुमान की पुष्टि करता है। इतने विपुलकाय भाष्यों का प्रणयन एक व्यक्ति के द्वारा संभव नहीं है। फलत: सायण इस विद्वमंडली के नेता के रूप में प्रतिष्ठित थे और उस काल के महनीय विद्वानों के सहयोग से ही यह कार्य संपन्न हुआ था।
 
== वेदभाष्यों का महत्व ==
बेनामी उपयोगकर्ता