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[[चित्र:Flowering_kudzu.jpg|thumb|right|फैबेसीफ़बासिए कुल का एक पौधा]]
[[चित्र:Vicia sepium10 ies.jpg|right|thumb|300px|फैबेसीफ़बासिए कुल की अनेक स्पीशीज़ की जड़ों में ग्रंथिकाएँ (nodules) होती हैं (सफेद रंग) , जिनमें हवा के [[नाइट्रोजन यौगिकीकरण|नाइट्रोजन का यौगिकीकरण]] (fixing) करनेवाले [[जीवाणु]] विद्यमान रहते हैं।]]
'''फ़ैबेसीफ़बासिए''' (Fabaceae), '''लेग्युमिनोसी''' (Leguminosae) या '''पापील्योनेसी''' (Papilionaceae) एक महत्त्वपूर्ण [[पादप]] [[कुल]] है जिसका बहुत अधिक आर्थिक महत्त्व है। इस कुल में लगभग ४०० वंश तथा १२५० जातियाँ मिलती हैं जिनमें से [[भारत]] में करीब ९०० जातियाँ पाई जाती हैं। इसके पौधे उष्ण प्रदेशों में मिलते हैं। [[शीशम]], [[काला शीशम]], [[कसयानी]], [[सनाई]], [[चना]], [[अकेरी]], [[अगस्त पौधा|अगस्त]], [[मसूर]], [[खेसारी]], [[मटर]], [[उरद]], [[मूँग]], [[सेम]], [[अरहर]], [[मेथी]], [[मूँगफली]], [[ढाक]], [[इण्डियन टेलीग्राफ प्लाण्ट]], [[सोयाबीन]] एवं [[रत्ती]] इस कुल के प्रमुख पौधे हैं। लेग्युमिनोसी द्विबीजपत्री पौधों का विशाल कुल है, जिसके लगभग ६३० वंशों (genera) तथा १८,८६० जातियों का वर्णन मिलता है। इस कुल के पौधे प्रत्येक प्रकार की जलवायु में पाए जाते हैं, परंतु प्राय: शीतोष्ण एवं उष्ण कटिबंधों में इनका बाहुल्य है। इस कुल के अंतर्गत शाक (herbs), क्षुप (shrubs) तथा विशाल पादप आते हैं। कभी कभी इस कुल के सदस्य आरोही, जलीय (aquatic), मरुद्भिदी (xerophytic) तथा समोद्भिदी (mescphytic) होते हैं।
 
इस कुल के पौधों में एक मोटी जड़ होती है, जो आगे चलकर मूलिकाओं (rootlets) एवं उपमूलिकाओं में विभक्त हो जाती है। अनेक स्पीशीज़ की जड़ों में ग्रंथिकाएँ (nodules) होती हैं, जिनमें हवा के [[नाइट्रोजन यौगिकीकरण|नाइट्रोजन का यौगिकीकरण]] (fixing) करनेवाले [[जीवाणु]] विद्यमान रहते हैं। ये जीवाणु नाइट्रोजन का स्थायीकरण कर, खेतों को उर्वर बनाने में पर्याप्त योग देते हैं। अत: ये अधिक आर्थिक महत्व के हैं। इसी वर्ग के पौधे [[अरहर]], [[मटर]], [[ऐल्फेल्फा]] (alfalfa) आदि हैं।
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[[श्रेणी:फ़बासिए|*]]
[[श्रेणी:पादप कुल]]