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ऋषि - कण्व, निवास स्थान - पृथ्वीस्थानीय, सूक्त संख्या - 120
 
नवम मण्डल से सम्बद्ध [[सोम]], ऋग्वेद का प्रमुख देवता है। ऋग्वेदनुसार सोम एक वनस्पति थी जो [[मुञ्जवान पर्वत]] पर पैदा होती थी। इसका रस अत्यधिक शक्तिशाली एवं स्फूर्तिदायक था। [[सोमरस]] इन्द्र का प्रियपेयप्रिय पेय पदार्थ था सोमरस का पान करके ही उसने [[वृत्र]] का वध किया था। सोमरस देवताओं को अमरत्व प्रदान करता है। सोम का वास्तविक निवास स्थान स्वर्ग ही है। श्येन द्वारा पृथ्वी पर औषधि के रूप में लाया गया है। ऋग्वेद में सोम को त्रिषधस्थ, विश्वजित्, अमरउद्दीपक, अघशंस, स्वर्वित्, पवमान आदि विशेषण मिलते हैं।
 
[[श्रेणी:वेद]]