"असमिया भाषा" के अवतरणों में अंतर

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भारतीय आर्यभाषाओं की शृंखला में पूर्वी सीमा पर स्थित होने के कारण असमिया कई अनार्य भाषापरिवारों से घिरी हुई है। इस स्तर पर सीमावर्ती भाषा होने के कारण उसके शब्दसमूह में अनार्य भाषाओं के कई स्रोतों के लिए हुए शब्द मिलते हैं। इन स्रोतों में से तीन अपेक्षाकृत अधिक मुख्य हैं :
 
*(1) ऑस्ट्रो-एशियाटिक - (अ) खासी, (आ) कोलारी, (इ) मलायन
 
*(2) तिब्बती-बर्मी-बोडो
(इ) मलायन
 
*(3) थाई-अहोम
(2) तिब्बती-बर्मी-बोडो
 
(3) थाई-अहोम
 
शब्दसमूह की इस मिश्रित स्थिति के प्रसंग में यह स्पष्ट कर देना उचित होगा कि खासी, बोडो तथा थाई तत्व तो असमिया में उधार लिए गए हैं, पर मलायन और कोलारी तत्वों का मिश्रण इन भाषाओं के मूलाधार के पास्परिक मिश्रण के फलस्वरूप है। अनार्य भाषाओं के प्रभाव को असम के अनेक स्थाननामों में भी देखा जा सकता है। ऑस्ट्रिक, बोडो तथा अहोम के बहुत से स्थाननाम ग्रामों, नगरों तथा नदियों के नामकरण की पृष्ठभूमि में मिलते हैं। अहोम के स्थाननाम प्रमुखत: नदियों को दिए गए नामों में हैं।
 
== इतिहास ==
असमिया भाषा का व्यवस्थित रूप 13वीं तथा 14वीं शताब्दी से मिलने पर भी उसका पूर्वरूप बौद्ध सिद्धों के "[[चर्यापद]]" में देखा जा सकता है। "चर्यापद" का समय विद्वानों ने ईसवी सन् 600 से 1000 के बीच स्थिर किया है। इन दोहों के लेखक सिद्धों में से कुछ का तो कामरूप प्रदेश से घनिष्ट संबंध था। "चर्यापद" के समय से 12वीं शताब्दी तक असमी भाषा में कई प्रकार के मौखिक साहित्य का सृजन हुआ था। मणिकोंवर-फुलकोंवर-गीत, डाकवचन, तंत्र मंत्र आदि इस मौखिक साहिय के कुछ रूप हैं।
 
असमिया भाषा का पूर्ववर्ती, अपभ्रंशमिश्रित[[अपभ्रंश]]मिश्रित बोली से भिन्न रूप प्राय: 18 वीं18वीं शताब्दी से स्पष्ट होता है। भाषागत विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए असमिया के विकास के तीन काल माने जा सकते हैं :
 
=== प्रारंभिक असमिया ===
असमीया के शिष्ट और लिखित साहित्य का इतिहास पाँच कालों में विभक्त किया जाता है:
 
*(१) वैष्णवपूर्वकाल : 1200-1449 ई.,
 
*(2) वैष्णवकाल : 1449-1650 ई.,
 
*(3) गद्य, [[बुरंजी]] काल : 1650-1926 ई.,
 
*(4) आधुनिक काल : 1026-1947 ई.,
 
*(5) स्वाधीनतोत्तरकाल : 1947 ई.-।
 
असमीया साहित्य की १६वी सदी से १९वीं सदी तक की काव्य धारा को छह भागों में बाँट सकते हैं-