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इतिहास क्रम
(इतिहास क्रम)
'''हिन्दी दिवस का इतिहास''' और इसे दिवस के रूप में मनाने का कारण बहुत पुराना है। वर्ष 1918 में [[महात्मा गांधी]] ने इसे जनमानस की भाषा कहा था और इसे देश की राष्ट्रभाषा भी बनाने को कहा था। लेकिन आजादी के बाद ऐसा कुछ नहीं हो सका। सत्ता में आसीन लोगों और जाति-भाषा के नाम पर राजनीति करने वालों ने कभी [[हिन्दी]] को राष्ट्रभाषा बनने नहीं दिया।<ref>{{समाचार सन्दर्भ|title=हिन्दी दिवस : हिन्दी है हिन्द की धड़कन|url=http://days.jagranjunction.com/2012/09/14/hindi-diwas-and-its-importance-हिन्दी-दिवस-हिन्दी-है/|accessdate=1 मार्च 2016|publisher=दैनिक जागरण|date=14 सितम्बर 2012}}</ref>
 
==इतिहास क्रम==
===1918 के बाद===
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने के लिए [[काका कालेलकर]], [[मैथिलीशरण गुप्त]], [[हजारी प्रसाद द्विवेदी]], [[सेठ गोविन्ददास]] और [[व्यौहार राजेन्द्र सिंह]] आदि लोगों ने बहुत से प्रयास किए। जिसके चलते इन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएँ भी की।<ref>{{cite news|title=हिन्दी दिवस विशेष: इनके प्रयास से मिला था हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा|url=http://www.patrika.com/news/jabalpur/know-hindi-had-the-status-of-national-language-1398330/|accessdate=14 सितम्बर 2016|date=13 सितम्बर 2016|publisher=पत्रिका|location=जबलपुर}}</ref>
 
===हिन्दी दिवस की शुरुआत (1949 से 1950)===
13 सितम्बर 1949 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित [[जवाहरलाल नेहरू]] ने कहा कि किसी विदेशी भाषा से कोई देश महान नहीं बन सकता, क्योंकि कोई भी विदेश भाषा आम लोगों की भाषा नहीं बन सकता है। 14 सितंबर 1949 में हिन्दी भाषा के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस कारण हिन्दी दिवस के लिए इस दिन को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया। इस कारण हर वर्ष 14 सितम्बर के दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
 
===भारत की राजभाषा नीति (1950 से 1965)===
26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के साथ साथ राजभाषा नीति भी लागू हुई। संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि भारत की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप है। हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा का प्रयोग भी सरकारी कामकाज में किया जा सकता है। अनुच्छेद 343 (2) के अंतर्गत यह भी व्यवस्था की गई है कि संविधान के लागू होने के समय से 15 वर्ष की अवधि तक, अर्थात वर्ष 1965 तक संघ के सभी सरकारी कार्यों के लिए पहले की भांति अंग्रेज़ी भाषा का प्रयोग होता रहेगा। यह व्यवस्था इसलिए की गई थी कि इस बीच हिन्दी न जानने वाले हिन्दी सीख जायेंगे और हिन्दी भाषा को प्रशासनिक कार्यों के लिए सभी प्रकार से सक्षम बनाया जा सकेगा।
 
वर्ष 1965 तक 15 वर्ष हो चुका था, लेकिन उसके बाद भी अंग्रेजी को हटाया नहीं गया और अनुच्छेद 334 (3) में संसद को यह अधिकार दिया गया कि वह 1965 के बाद भी सरकारी कामकाज में अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी रखने के बारे में व्यवस्था कर सकती है।
 
===अंग्रेज़ी का विरोध (1965 से 1967)===
{{मुख्य|अंग्रेजी हटाओ आंदोलन}}
26 जनवरी 1965 को संसद में यह प्रस्ताव पारित हुआ कि "हिन्दी का सभी सरकारी कार्यों में उपयोग किया जाएगा, लेकिन उसके साथ साथ अंग्रेज़ी का भी सह राजभाषा के रूप में उपयोग किया जाएगा।" वर्ष 1967 में संसद में "भाषा संशोधन विधेयक" लाया गया। इसके बाद अंग्रेज़ी को अनिवार्य कर दिया गया। इस विधेयक में धारा 3(1) में हिन्दी की चर्चा तक नहीं की गई। इसके बाद अंग्रेज़ी का विरोध शुरू हुआ। 5 दिसंबर 1967 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राज्यसभा में कहा कि हम इस विधेयक में विचार विमर्श करेंगे।<ref>{{समाचार सन्दर्भ|title=मजूमदार थे अंग्रेजी हटाओ आंदोलन के अगुआ, इंदिरा ने सदन में दिया था बयान|url=http://www.bhaskar.com/news/UP-VAR-hindi-diwas-special-d-majumdar-first-start-campaign-for-save-hindi-5112293-PHO.html|accessdate=3 मार्च 2016|publisher=दैनिक भास्कर|date=14 सितम्बर 2015}}</ref>
 
===वर्ष 1990 व उसके बाद===
वर्ष 1990 में प्रकाशित एक पुस्तक "राष्ट्रभाषा का सवाल" में [[शैलेश मटियानी]] जी ने यह सवाल किया था कि हम 14 सितम्बर को ही हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं। इस पर प्रेमनारायण शुक्ला जी ने हिन्दी दिवस के दिन [[इलाहाबाद]] में इसके कारण को बताया था कि इस दिन ही हिन्दी भाषा के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। इस कारण इस दिन को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है। लेकिन वे इस जवाब से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने कहा कि इस दिन को हम राष्ट्रभाषा या राजभाषा दिवस के रूप में क्यों नहीं मनाते हैं। इसके साथ ही शैलेश जी ने इस दिन हिन्दी दिवस मनाने को शर्मनाक पाखंड करार दिया था।<ref>{{समाचार सन्दर्भ|title=हिंदी दिवस पर फिर उठे महान कथाकार के सुलगते सवाल|url=http://dehradun.amarujala.com/news/city-hulchul-dun/story-on-hindi-diwas-hindi-news/|accessdate=3 मार्च 2016|publisher=अमर उजाला|date=14 सितम्बर 2015}}</ref>