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'''विजयंत टैंक''' - भारतीय सेना का अपना टैंक है। [[हेवी वेहिकल फैक्टरी]] (आवड़ी) में निर्मित इस टैंक में गोलाबारी करने की अपार शक्ति के साथ-साथ चौतरफा घूम फिरकर मार करने की क्षमता है। इस टैंक में अमरीका के एम. 60 तथा जर्मनी के लयर्ड टैंकों की तरह की 105 मि.मी. के गन के साथ-साथ मशीनगन तथा एँटी एयरक्राफ़्ट गन भी लगी हुई है।
[[File:Vijyant Tank Bhopal.jpg|thumb|विजयंत टैंक ,लाल घाटी चोरहा ,भोपाल]]
 
'''याँत्रिक वाहन''' - सन् 1909 में इंग्लैंड के युद्धकार्यालय (वार आफिस) ने 7,500 रुपए का पारितोषिक ऐसे [[ट्रैक्टर]] (गाड़ी) के लिए घोषित किया जो आठ टन के बोझ को लेकर 200 मील बिना ईंधन या उपस्नेहक (ल्युब्रिकेटिंग आयल) लिए चल सके। तभी से तोपवाहक याँत्रिक गाड़ियों का जन्म हुआ। अब ऐसी गाड़ियाँ उपलब्ध हैं जो बिना सड़क के ही खेत आदि में सुगमता से चल सकती हैं। इनके पहियों पर श्रृंखलाओं का पट्टा चढ़ा रहता है। इसके कारण ये गाड़ियाँ ऊबड़-खाबड़ भूमि पर चल सकती हैं। इन गाड़ियों का वेग 30-35 मील प्रतिघंटा होता है, परंतु श्रृंखला पट्टा लगभग डेढ़ हजार मील के बाद खराब हो जाता है। [[द्वितीय विश्वयुद्ध]] में चार अथवा छह पहियों के तोप ट्रैक्टर बने, जिनमें साधारण मोटरकारों की तरह, परंतु विशेष भारी, हवा भरे रबर के पहिए रहते थे। इनमें लगभग 100 [[अश्व सामर्थ्य]] के इंजन रहते थे और इनपर नौ दस टन भार तक की तोपें लद सकती थीं।