"ताज होटल्स रिसॉर्ट्स एंड पैलेसेज" के अवतरणों में अंतर

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टाटा ग्रूप के संस्थापक जमशेदजी नुसीरवानजी टाटा ने १६ दिसंबेर १९०३ को अरब सागर के तट पर मुंबई (पहले बंबई के नाम से जाना जाता था) मे ताज महल पॅलेस के नाम से एक भव्य होटेल का उद्घाटन किया। यह ताज ग्रूप के पहली परिसंपत्ति और पहला होटेल था। जम्सेत जी द्वारा इस होटेल का निर्माण करने के पीछे छुपे कारणों से जुड़ी कई दंतकथाएँ है। एक कहानी के अनुसार इसके पीछे मुंबई के वाट्सन'स होटेल (जहाँ सिर्फ़ युरोपियन लोगो को ही जाने की अनुमति थी) मे उन्हे नस्लीय भेदभाब के कारण प्रवेश ना दिया जाना कारण बना था। <ref name="इंडिपेंडेंट१">{{cite news|url=http://www.independent.co.uk/news/world/asia/from-parsee-priests-to-profits-say-hello-to-tata-434575.html |title=फ्रॉम पारसी प्रीस्ट्स टू प्रॉफ़िट्स: से हेल्लो टू टाटा - एशिया, वर्ल्ड |work=डी इंडिपेंडेंट |date=१ फेब्रुअरी २००७ |accessdate=१५ सितम्बर २०१०}}</ref>
 
1984 में, ताज समूह ने लिए एक लाइसेंस समझौते के तहत प्राप्त कर लिया, उनमे से ताज कॉन्नेमेरा चेन्नई में (अब विवांता ताज द्वारा - कॉन्नेमेरा) और सेवॉय होटल ऊटी में, [[बैंगलोर]] में ताज वेस्ट एंड के खुलने के साथ ताज समूह बैंगलोर में अपनी धावा बनाया |<ref>{{cite web|url=https://www.cleartrip.com/hotels/info/taj-savoy-hotel-123320 |title=ताज सेवॉय होटल के बारे में |publisher=क्लेरट्रिप.कॉम |accessdate=४ अक्टूबर २०१६}}</ref>
 
उन दिनो ब्रिटिश इंडिया मे होटलों के अंदर सिर्फ़ युरोपियन लोगो को ही प्रवेश दिया जाना आम बात थी, पर जमशेदजी टाटा के जैसे क्षमता वाले व्यापारी का केवल इस आधार पर होटेल का निर्माण करना थोड़ा अटपटा लगता है। एक और कहानी मे उन्होने होटेल खोलने का निश्चय तब किया जब उनके एक मित्र ने बंबई मे एक भी ढंग का होटेल न होने की शिकायत की। पर इस सन्दर्भ मे सबसे संभाव्य कारण लवेट फ्रेज़र - जमशेदजी के करीबी मित्र और आई एच. सी. एल. ग्रूप के पहले निदेशको मे से एक - का है जो कहतें हैं कि यह विचार जमशेदजी के दिमाग़ मे लंबे समय से चल रहा था और उन्होने इस विषय पर गहरा शोध भो किया था।
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