"दण्डपाणि जयकान्तन": अवतरणों में अंतर

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घर से भाग कर १२ साल के जयकान्तन अपने चाचा के यहाँ पहुँचे जिनसे उन्होंने कम्युनिज़्म (मार्कसीय समाजवाद) के बारे में सीखा। बाद में [[चेन्नई]] (जिसका नाम उस समय [[मद्रास]] था) आकर जयकान्तन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की पत्रिका ''जनशक्ति'' में काम करने लगे। दिन में प्रेस में काम करते और शाम को सड़कों पर पत्रिका बेचते।
 
१९५० के दशक की शुरुवातशुरुआत से ही वह लिखते आ रहे हैं और जल्दी ही तमिल के जाने-माने लेखकों में गिने जाने लगे। हालांकिहालाँकि उनका नज़रिया वाम पक्षीय ही रहा,रहा। वह खुद पार्टी के सदस्य न रहे और काँग्रेस पार्टी में भर्ती हो गए।
 
४० उपन्यासों के अलावा उन्होंने कई-कई लघुकथाएँ, आत्मकथा (दो खंडों में) और रोमेन रोलांड द्वारा फ़्रेन्च में रची गयी [[महात्मा गांधी|गांधी जी]] की जीवनी का तमिल अनुवाद भी किया है।