"चिकित्सालय" के अवतरणों में अंतर

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=== बहिरंग विभाग (OPD) ===
बहिरंग विभाग में केवल बाहर के रोगियों की चिकित्सा की जाती है। वे औषधिऔषधे लेकर या मरहम पट्टी करवाकर अपने घर चले जाते हैं। इस विभाग में रोगी के रहने का प्रबंध नहीं होता। यह विभाग नगर के बीच में होना चाहिए जहाँ जनता का पहुँचना सुगम हो। इसके साथ ही एक आपात (इमरजेंसी) विभाग भी होना चाहिए जहाँ आपद्ग्रस्त रोगियों का, कम से कम, प्रथमोपचार तुरंत किया जा सके। आधुनिक अस्पतालों में इस विभाग के बीच में एक बड़ा कमरा, जिसमें रोगी प्रतीक्षा कर सके, बनाया जाता है। उसमें एक ओर "पूछताछ" का स्थान रहता है और दूसरी और अभ्यर्थक (रिसेप्शनिस्ट) का कार्यालय, जहाँ रोगी का नाम, पता आदि लिखा जाता है और जहाँ से रोगी को उपयुक्त विभाग में भेजा जाता है। अभ्यर्थक का विभाग उत्तम प्रकार से, सब सुविधाओं से युक्त, बनाया जाए तथा उसमें कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या हो, जो रोगी को उपयुक्त विभाग में पहुँचाएँ तथा उसकी अन्य सब प्रकार की सहायता करें। बहिरंग विभाग में निम्नलिखित अनुविभाग होने चाहिए:
 
1.चिकित्सा, 2. शल्य, 3. व्याधिकी (पैथॉलोजी), 4. स्त्रीरोग, 5. विकलांग (ऑर्थोपीडिक), 6. शलाक्य (इयर-नोज़-थ्रोट), 7. नेत्र, 8. दंत, 9. क्षयरोग, 10. चर्म और रतिजरोग 11.बालरोग (पीडियेट्रिक्स) और 12. आपत्ति अनुविभाग
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