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जय नन्दवंस रोहताश
'''कर्पुरी ठाकुर''' (24 जनवरी 1924 - 18 फरवरी 1988) [[भारत]] के स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ तथा [[बिहार]] [[राज्य]] के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।<ref>http://cm.bih.nic.in/formercm-bihar.htm</ref> <ref>http://cm.bih.nic.in/formercm-bihar.htm</ref> लोकप्रियता के कारण उन्हें जन-नायक कहा जाता था|<ref>http://www.prabhatbooks.com/mahan-karmayogi-jannayak-karpuri-thakur-vol-2.htm</ref> <ref>http://www.bhaskar.com/news/BIH-PAT-karpuri-thakur-jayanti-celebrated-in-bihar-4502149-NOR.html</ref> कर्पूरी ठाकुर का जन्म भारत में ब्रिटिश शासन काल के दौरान [[समस्तीपुर]] के एक गाँव पितौंझिया, जिसे अब कर्पूरीग्राम कहा जाता है, में हुआ था।<ref>http://www.prabhatbooks.com/mahan-karmayogi-jannayak-karpuri-thakur-vol-2.htm</ref> <ref>http://samastipur.bih.nic.in/eminent.aspx</ref> [[भारत छोड़ो आन्दोलन]] के समय उन्होंने २६ महीने जेल में बिताए थे। वह 22 दिसंबर 1970 से 2 जून 1971 तथा 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 1979 के दौरान दो बार [[बिहार]] के [[मुख्यमंत्री]] पद पर रहे।<ref>http://cm.bih.nic.in/formercm-bihar.htm</ref>
 
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