"सिवनी ज़िला" के अवतरणों में अंतर

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शासकीय बस स्टेंड से कुछ दूरी पर बाएँ तरफ है। यहां तालाब के बीच में टापू बना है। तालाब राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे लगभग 50 एकड भू क्षेत्र में फैला है। तालाब के किनारे सुन्दर घाट, चौपाटी, स्वच्छ परिसर एवं बीचों बीच वन टापू पर हरे भरे खूबसूरत पेड लगे है। नौकाविहार की सुविधापूर्ण व्यवस्था होने के कारण यह एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हुआ है। यह जिले की एक ऐतिहासिक धरोहर तथा सिवनी नगर की पहचान है।
== [[वैनगंगा नदी]]==
यहां मध्यप्रदेश की एक प्रमुख नदी है [[वैनगंगा नदी]] सिवनी जिले की जीवनधारा के रूप में जानी जाती है। इस नदी का उद्गम स्थल गोपालगंज से लगभग 6 कि.मी. पूर्वी दिशा में ग्राम मुंडारा मे हुआ है।एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी से निर्मित [[भीमगढ संजय सरोवर बांध]] हैँ यहा बाँध [[वैनगंगा नदी]] पर जिले के [[छपारा]] ब्लाक के अंतर्गत भीमगढ़ में बना हुआ है। यह नदी सिवनी की अर्द्व परिक्रमा करती हुई लखनवाड़ा दिघोरी [[बंडोल]] [[छपारा]] होते हुए [[बालाघाट जिला]], भंडारा तथा चांदा जिले से बहती हुई [[वैनगंगा नदी]] वर्धा नदी मेँमें मिल जाती है। आगे जाकर कन्हान,बावनथडी तथा [[ पेँचपेंच नदी]] भी [[वैनगंगा नदी]] से मिल जाती है वर्धा,कन्हान,[[पेँचपेंच नदी]],तथा बावनथडी इसकी सहायक नदीयाँ है।
आगे जाकर वैनगंगा नदी भी [[गोदावरी नदी]] मेँमें मिल जाती हैँ। इस प्रकार ये नदी गोदावरी नदी जैसी महानदी मैँ मिलकर अपना उद्देशय पूर्ण कर लेती हैँ।
 
==पेँचपेंच राष्ट्रीय उद्यान==
जिले का मुख्य आकर्षण पेंच टाइगर सेंचुरी है जो [[जबलपुर]] से 192 और [[नागपुर]] से 92 कि॰मी॰ की दूरी पर है।
इसके पयर्टन का उत्कृष्ट मौसम मार्च से जून है।
राष्ट्रीय उद्यान की शुरूआत 1 अक्टूबर से और बंद 30 जून को होता हैँ। मौसमः मार्च से जून
[[पेंच राष्ट्रीय उद्यान]]
757.85 किलोमीटर पर फैला है यह बफर जोन के अन्तर्गत आता है [[पेँचपेंच नदी]] इसी राष्ट्रीय उद्यान से होकर गई जिससे जंगली जानवर के लिए ये नदी जीवनदायनी से कम नही हैँ। इस बाघ अभ्यारण मे बाघ, नीलगाय, बारहसिंगा, हिरन, मोर, बन्दर, काले हिरन, सांभर, जंगली सुअर, सोनकुत्ता एवं अन्य जानवर तथा अनेक प्रकार के पक्षी बहुतायत में पाये जाते है। खासकर बाघ को देखेने पर्यटक दूर दूर से आते हैँ।
 
== मोँगली लैँड ==
इसलिए इस जिले को मोंगली लैँड के नाम से भी जाना जाता है।
== नवरात्र उत्सव ==
जिले मेँमें चैत्र और शारदीय नवरात्री बड़े ही उत्साह और धूमधाम से मानाया जाता है शारदीय नवरात्री मेँमें विशेष अकर्षण का केन्द्र यह की भव्य झाँकियाँ होती है यह नौ दिन पूरा शहर लाइटो से जगमगा जाता है दूर - दूर से लोग इन भव्य झांकियो को देखने आते हैँ और दशहरा के दिन रावण का पुतला दहन के साथ ही यह आयोजन समाप्त होता हैँ।
== दर्शनीय स्थल ==
* दलसागर तालाब