"ज्यां-पाल सार्त्र" के अवतरणों में अंतर

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{{जीवनचरित-आधार}}
 
ज्यां-पाल सार्त्र [[अस्तित्ववाद]] के पहले विचारकों में से माने जाते हैंहैं। वह बीसवीं सदी में फ्रान्स के सर्वप्रधान दार्शनिक कहे जा सकते हैंहैं। कई बार उन्हें अस्तित्ववाद के जन्मदाता के रूप में भी देखा जाता हैहै।
 
अपनी पुस्तक "ल नौसी" में सार्त्र एक ऐसे अध्यापक की कथा सुनाते हैं जिसे ये इलहाम होता है कि उसका पर्यावरण जिससे उसे इतना लगाव है वो बस कि़ञ्चित् निर्जीव और तत्वहीन वस्तुओं से निर्मित है। किन्तु उन निर्जीव वस्तुओं से ही उसकी तमाम भावनाएँ जन्म ले चुकी थीं।